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AAP में और बढ़ा कद, MLA राघव चड्ढा बना दिए गए पंजाब इकाई के सह-प्रभारी, सिसोदिया के सहायक रहते सिर्फ 1 रुपए प्रतिमाह लिया था वेतन

राघव चड्ढा दिल्ली के राजेंदर नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: December 20, 2020 2:43 PM
raghav chadha, farmers protest, farm act 2020राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।

दिल्ली की केजरीवाल सरकार में विधायक राघव चड्ढा का पार्टी में कद और बढ़ाया गया है। चड्ढा को अब पंजाब इकाई का सह प्रभारी बनाया गया है। माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी लंबे समय से पंजाब में एक युवा चेहरे को प्रभारी के तौर पर भेजना चाह रही थी। अब चड्ढा का नाम इस पद के लिए चुना गया है।

बता दें कि किसान आंदोलन के बीच आप की नजर पंजाब में दो साल बाद होने वाले चुनाव पर हैं। पंजाब इकाई के मौजूदा प्रभारी भगवंत मान लगातार किसानों के प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं। पिछले हफ्ते वे पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ सिंघु बॉर्डर स्थित आंदोलन में शामिल हुए थे।

कौन हैं राघव चड्ढा, क्या है पार्टी के लिए उनकी अहमियत?: गौरतलब है कि राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। वे इसी बार दिल्ली में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल की। इससे पहले उन्होंने 2019 में दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। इसमें भाजपा के रमेश सिंह बिधूड़ी ने सीट जीती थी और राघव दूसरे स्थान पर रहे थे।

पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर उनके चुनाव लड़ने से काफी पहले ही शुरू हो चुका था। वे 2012 में अरविंद केजरीवाल से मिले थे। इसके बाद से ही वे आम आदमी पार्टी में कई अहम पदों पर रहे हैं। वे आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। चड्ढा 2013 में AAP के घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने वाली टीम का हिस्सा थे। वह पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के पद पर रह चुके हैं।

राघव ने साल 2016 में दिल्ली के बजट का मसौदा तैयार करने में उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सहायक के पद पर भी काम किया। सहायक के तौर पर काम करते हुए उन्होंने मात्र एक रुपया प्रतिमाह वेतन लिया था। राघव ने वित्तीय सलाहकार के तौर पर भी सेवाएं दी, मगर अप्रैल 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उनकी नियुक्ती रद्द कर दी गई। इसके बाद उन्होंने गृह मंत्रालय को अपना ढाई महीने का वेतन- 2.5 रुपये वापस कर दिया था।

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