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मनीष सिसोदिया ने पीएमओ से पूछा, पीएम नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया मैनेजमेंट पर कितना होता है खर्च तो जवाब मिला- जीरो

पीएमओ से जुड़े सूत्रों ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री ऑफिस का आधिकारिक मोबाइल ऐप 'पीएमओ इंडिया' छात्रों ने एक प्रतियोगिता के तहत डिजाइन किया था।

Author नई दिल्ली | March 17, 2017 8:50 PM
एक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। ( Photo Source: Indian Express/ Prem Nath Pandey)

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने आरटीआई दाखिल करके पूछा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया मैनेजमेंट पर कितना खर्च किया जाता है। इस पर पीएमओ की तरफ से जवाब मिला कि मई 2014 से अब तक इसके लिए एक रुपए भी खर्च नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि पीएमओ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑफिस द्वारा संचालित किए जा रहे फेसबुक, टि्वटर, यूट्यूब और गूगल प्लस अकाउंट्स पर कोई भी सोशल मीडिया कैम्पेन नहीं चलाया गया।

पीएमओ से जुड़े सूत्रों ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री ऑफिस का आधिकारिक मोबाइल ऐप ‘पीएमओ इंडिया’ छात्रों ने एक प्रतियोगिता के तहत डिजाइन किया था। यह प्रतियोगिता MyGov और गूगल ने करवाई थी। सिसोदिया द्वारा दाखिल की गई आरटीआई के जवाब में लिखा गया है, ‘ऐप को डिजाइन करने के लिए दी गई विजेता राशि के अलावा कोई खर्च नहीं किया गया।’ हालांकि, विजेता राशि भी गूगल ने दी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश और विदेश में अपने भाषणों और बातचीत में अक्सर ‘नरेंद्र मोदी ऐप’ का जिक्र करते रहते हैं। पीएम मोदी इस ऐप को उनके साथ जुड़ने का आसान तरीका बताते हैं। सिसोदिया की ओर से दाखिल की गई आरटीआई का जवाब दिया गया है कि ‘नरेंद्र मोदी ऐप’ पीएमओ और भारत सरकार द्वारा ना तो बनाया गया और ना ही संचालित किया जाता है। नरेंद्र मोदी ऐप के डवलपर पेज पर जाने पर पता लगता है कि इसे भाजपा की आईटी सेल ने डिजाइन किया है और इसका संचालन भी पार्टी की आईटी सेल करती है।

हालही में एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए ऑल इंडिया रेडियो के एक अधिकारी ने खुलासा किया था कि शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम ‘मन की बात’ का विज्ञापन देखकर पीएम ने नाराजगी जताई थी। अधिकारी ने साथ ही बताया था कि ‘मन की बात’ एक ऐसा प्रोग्राम है, जिस पर ऑल इंडिया रेडियो कुछ खर्च नहीं करता, लेकिन उसे इससे कमाई जरूर अच्छी होती है। साल 2015-16 में ऑल इंडिया रेडियो को इस प्रोग्राम से 4.78 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था।

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