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किसान महापंचायत में AAP की एंट्री, अरविंद केजरीवाल करेंगे संबोधित, राकेश टिकैत जाएंगे सहारनपुर

केजरीवाल पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि 2022 के यूपी असेंबली चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी दस्तक देने जा रही है। लिहाजा किसानों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए अब वह किसान महापंचायत में शिरकत करने जा रहे हैं।

Arvind Kejriwalदिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (फोटो सोर्सः ट्विटर@vskutwal7)

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि 2022 के यूपी असेंबली चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी दस्तक देने जा रही है। लिहाजा किसानों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए अब वह किसान महापंचायत में शिरकत करने जा रहे हैं। रविवार को मेरठ में आप की पहली किसान महापंचायत होने जा रही है। उधर, किसान नेता राकेश टिकैत सहारनपुर की किसान पंचायत में शिरकत करेंगे।

केजरीवाल लगातार अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अभी उनके हौंसले बुलंद भी हैं, क्योंकि गुजरात के निकाय चुनाव में आप को अनुकरणीय सफलता हासिल हुई है। सूरत नगर निगम में उनका दल 27 सीटें जीतने में कामयाब रहा है। केजरीवाल को लगता है कि उनका दिल्ली मॉडल देश की जनता को लुभाने का माद्दा रखता है। लिहाजा अपनी नीतियों का प्रचार हर जगह कर रहे हैं। उनका निशाना यूपी, पंजाब के चुनाव हैं।

दिल्ली सीएम को पता है कि किसानों का हाथ थामे बगैर वह न तो पंजाब में मजबूती से लड़ाई लड़ सकते हैं और न ही यूपी में। किसान आंदोलन को वह शुरू से ही अपना समर्थन दे रहे हैं। यहां तक कि जब दिल्ली पुलिस ने किसानों के लिए टेंपरेरी जेल बनाने की अनुमति दिल्ली सरकार से मांगी तो केजरीवाल ने साफ इनकार कर दिया था। केजरीवाल इससे पहले भी किसानों के आंदोलन स्थल सिंघू बार्डर पर जा चुके हैं। दिल्ली असेंबली में किसान आंदोलन के बिलों की कॉपी को फाड़कर वह अपना विरोध जता चुके हैं। इससे पहले भी वह कई किसान नेताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।

उस बैठक में हालांकि राकेश टिकैत नहीं आए थे। तब टिकैत ने तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें नहीं पता है कि केजरीवाल से मिलने कौन-कौन से किसान नेता गए। सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार है जब टिकैत के गढ़ में दिल्ली सीएम एंट्री कर रहे हैं। आप की किसान महापंचायत मेरठ में हो रही है। टिकैत खुद भी इसी इलाके से हैं। हरियाणा और प. यूपी के किसानों की बदौलत ही आंदोलन 26 जनवरी के बाद फिर खड़ा हुआ था।

गौरतलब है कि केजरीवाल ने तीनों कृषि कानूनों को किसानों के लिए डेथ वॉरंट जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि अगर ये कानून लागू हो जाती हैं, तो किसानों की किसानी चंद पूंजीपतियों के हाथ में चली जाएगी। केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए। उनका सवाल था कि अगर सरकार हमारे देश के किसानों की कोई बात नहीं सुनेगी, तो फिर किसकी सुनेगी।

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