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अरविंद केजरीवाल का दावा: ‘आप’ पार्टी में सब ठीक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सप्ताहांत मची जबर्दस्त आंतरिक कलह और उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाले असंतुष्टों के खिलाफ कार्रवाई के बाद सोमवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी में सब कुछ ‘ठीक ठाक’ है। लेकिन पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के कई नेता एक के बाद एक सामने आ रहे स्टिंग और […]

Author March 31, 2015 8:42 AM
महाराष्ट्र में आप के कई नेता ‘बेहद निराश’ (फोटो: भाषा)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सप्ताहांत मची जबर्दस्त आंतरिक कलह और उनके नेतृत्व को चुनौती देने वाले असंतुष्टों के खिलाफ कार्रवाई के बाद सोमवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी में सब कुछ ‘ठीक ठाक’ है। लेकिन पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के कई नेता एक के बाद एक सामने आ रहे स्टिंग और विवादों से ‘बेहद निराश’ हैं और पार्टी में बने रहने पर फिर से विचार कर रहे हैं।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाले जाने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब होते हुए केजरीवाल ने पार्टी में उथलपुथल के सवाल पर कहा, ‘पार्टी ठीक ठाक है।’ पार्टी ने भूषण को राष्ट्रीय अनुशासन समिति के प्रमुख पद से भी बर्खास्त कर दिया है और उनकी जगह तीन सदस्यीय पैनल बनाया है। ये सदस्य आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के वफादार माने जाते हैं।

आप ने पार्टी नेतृत्व की आलोचना किए जाने पर रविवार को अपने आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास को भी हटा दिया था। उनकी जगह तीन सदस्यीय लोकपाल पैनल लाया गया है जिसमें दो पूर्व आइपीएस अधिकारी और एक शिक्षाविद शामिल हैं। उधर पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के कई नेता एक के बाद एक कर सामने आ रहे स्टिंग और विवादों से ‘बेहद निराश’ हैं और पार्टी में बने रहने पर फिर से विचार कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के कई नेताओं का मानना है कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी के अहम पदों से हटाए जाने के बाद आप नेताओं का ‘दिल्ली वाला गिरोह’ उनकी इकाई में ‘ज्यादा दखलंदाजी करेगा।’ पार्टी के फैसलों पर ‘नाराजगी’ जताते हुए महाराष्ट्र इकाई के वरिष्ठ नेता मारूति भापकर ने सोमवार को पद छोड़ने की धमकी दी । दिल्ली से रवाना होने से पहले भापकर ने कहा, ‘राष्ट्रीय परिषद की बैठक में जो कुछ हुआ वह लोकतंत्र की हत्या से कम कुछ भी नहीं था। मैं बहुत दुखी हूं और पार्टी छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहा हूं। हम मंगलवार को उस वक्त अपने भविष्य के कदम पर फैसला करेंगे जब हमारी प्रदेश समिति की बैठक होगी।’

राज्य के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘महाराष्ट्र इकाई पहले ही तथाकथित आप नेताओं के ‘दिल्ली वाले गिरोह’ से डरी हुई है। पार्टी में अभी हो रही छीछालेदर से अब हमारी इकाई में और दखलंदाजी होगी। हम अभी दोराहे पर हैं।’ आप नेता ने कहा, ‘शुरुआत से ही दिल्ली के नेताओं ने प्रदेश इकाइयों को कभी भी खुली छूट नहीं दी और कुमार विश्वास, संजय सिंह, मनीष सिसोदिया व आशीष खेतान जैसे (अरविंद) केजरीवाल के वफादारों ने हर मोड़ पर हमें नसीहत देने का काम किया जबकि उनके पास लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच काम करने का अनुभव न के बराबर है।’

बहरहाल, उन्होंने कहा कि वह घटनाक्रम पर नजर रखेंगे लेकिन पार्टी में बने रहने की संभावनाएं बहुत कम है। महाराष्ट्र में अण्णा आंदोलन की अगुआई कर चुके मयंक गांधी पहले ही केजरीवाल के ‘तानाशाही’ रवैए के खिलाफ बगावत कर चुके हैं, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पर उनके एक करीबी सूत्र ने कहा, ‘मौजूदा हालात में उनके लिए (मयंक के लिए) पार्टी में काम करना लगभग असंभव हो गया है।’

पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘आप’ की महाराष्ट्र इकाई की पूर्व प्रवक्ता प्रीति शर्मा मेनन, जिन्हें राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सदस्यों के दस्तखत लेते देखा गया था, को छोड़कर कोई भी अब पार्टी का कार्यकर्ता बने रहने को लेकर उत्साहित नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘अंजलि दमानिया (जो पहले ही पार्टी छोड़ चुकी हैं), विजय पंधारे, सुभाष वारे और राज्य के कुछ अन्य बड़े नेता लगातार सामने आ रहे स्टिंग और विवादों से काफी निराश हैं।’

 

 

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