आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की अधिकतर घटनाएं भाजपा के शासनकाल में हुई हैं।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई को होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा, एनएमईटी-यूजी 2026 को रद्द कर दिया है। क्योंकि इसकी जांच में पेपर लीक के सबूत मिले थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा मामले की जांच किए जाने के कारण 22 लाख से अधिक उम्मीदवार अब नई परीक्षा तिथियों का इंतजार कर रहे हैं।

NEET विवाद पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से परीक्षा की प्रश्नपत्र लीक होने की 93 घटनाएं हुई हैं। इनमें से अधिकतर घटनाएं भाजपा सरकारों के कार्यकाल में हुई हैं। इससे 6 करोड़ युवा प्रभावित हुए हैं। प्रश्नपत्र लीक की अधिकांश घटनाएं भाजपा शासित राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में हुई हैं।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि इन राज्यों में और केंद्र में भाजपा की सरकारें हैं। हमें खबरें मिल रही हैं कि हाल ही में हुए NEET पेपर लीक का केंद्र राजस्थान है। इससे संदेह पैदा होता है कि क्या वहां के नेता इसमें शामिल हैं? अगर ऐसा है, तो सीबीआई क्या कर सकती है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 2017, 2021, 2024 में पेपर लीक हुए थे। उस समय सीबीआई को जांच सौंप दी गई। क्या सीबीआई ने कुछ किया? इस बार भी सीबीआई को जांच सौंपी गई है। क्या सीबीआई कुछ करेगी?

केजरीवाल ने आगे कहा कि सीबीआई उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जो देश में पेपर लीक करा रहे हैं। जब से मोदी सरकार आई है तब से कुल 93 पेपर लीक हुए हैं। करीब 6 करोड़ युवाओं का भविष्य इन पेपरों में बंद था। इससे शक तो पैदा होता है। क्या इनके नेता पेपर लीक करा रहे हैं? उन्होंने कहा कि अगर नेपाल और बांग्लादेश के जेन-ज़ी सरकार बदल सकते है तो क्या हमारे देश के जेन-ज़ी पेपर लीक करने वाले मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकता है।

NEET पेपर लीक कांड: 5000 रुपये वाला व्हाट्सऐप ग्रुप, ‘गेस पेपर’ के नाम पर बिका असली प्रश्नपत्र

2026 का पेपर लीक हो गया है। पेपर लीक का खुलासा राजस्थान में एक WhatsApp मैसेज के नीचे लिखे ऑटोमैटिक नोट- ‘Forwarded many times’ से शुरू हुआ। जांचकर्ताओं को एक तथाकथित ‘गेस पेपर’ की जांच के दौरान व्हाट्सऐप पर यह मैसेज मिला। तब उन्हें एहसास हुआ कि मामला केवल सीमित लीक का नहीं बल्कि कहीं बड़े स्तर पर फैले नेटवर्क का है। पढ़ें पूरी खबर।