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रविशंकर प्रसाद ने रिलायंस से उठाया निजी फायदा: आप

प्रतिभा शुक्ल आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के रिलायंस से निजी फायदा लेने का खुलासा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने प्रधानमंत्री से भी इस मामले में दखल की मांग की है। आप ने पूर्व मंत्री मनीष तिवारी पर भी इसी तरह का आरोप लगाया है। […]

Author December 19, 2014 12:09 PM
आम आदमी पार्टी ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के रिलायंस से निजी फायदा लेने का खुलासा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है

प्रतिभा शुक्ल

आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद के रिलायंस से निजी फायदा लेने का खुलासा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने प्रधानमंत्री से भी इस मामले में दखल की मांग की है। आप ने पूर्व मंत्री मनीष तिवारी पर भी इसी तरह का आरोप लगाया है। आप का आरोप है कि दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने रिलायंस समूह की एक कंपनी (फाइन टेक निगम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी) से रिटेनरशिप फीस ली।

आप के सूत्र ने गुरुवार को इस बिल की प्रति देते हुए कहा कि रिटेनरशिप के रूप में कुल 84 लाख रुपए की राशि ली गई। आरोप है कि रिटेनरशिप फीस राहत देने के बदले में ली गई। रविशंकर प्रसाद ने इस साल 26 मई से लेकर दस नवंबर तक दूरसंचार के अलावा विधि मंत्रालय का भी कार्यभार संभाला है। फाइन टेक निगम प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस समूह की एक कंपनी है। इस कंपनी के तीन निदेशक हैं। तीनों रिलायंस समूह की विभिन्न अन्य कंपनियों में भी निदेशक हैं। चार मामलों में रिलायंस की ओर से बरती गई अनियमितता को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।

आप के आधिकारिक सूत्र ने दावा किया कि दूरसंचार विभाग ने बड़ी दृढ़ता से नियंत्रक व महालेखा परीक्षक की ओर से मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) और नहाटा परिवार के स्वामित्व वाली इन्फोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज को लेकर उठाए गए सवालों का खंडन किया है। जिसके कारण सरकार को 20,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। पूरा मामला अनैतिक तरीके से एहसान का है। क्या यह सच नहीं है कि मौजूदा दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद जी मामले में रिलायंस जियो को जारी होने वाले नोटिस को दबा कर बैठ गए हैं। प्रशांत भूषण और एक अन्य व्यक्ति की ओर से दूरसंचार विभाग, प्रधानमंत्री और केंद्रीय सतर्कता आयोग को दायर शिकायत के बाद अप्रैल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद डाट अधिकारियों ने रिलायंस जियो के लिए एक नोटिस तैयार किया कि क्यों नहीं उसके अनुबंध को खारिज कर दिया जाए?

आप का आरोप है कि दूरसंचार मंत्री पिछले तीन महीने से इस नोटिस को दबा कर बैठे हैं। वे क्यों नहीं डाट के एक्सेस सर्विस विभाग को रिलायंस को नोटिस जारी करने की इजाजत देते? रविशंकर प्रसाद को तुरंत दूरसंचार मंत्रालय से इस्तीफा दे देना चाहिए। फिलहाल वे ऐसे किसी भी कार्यभार को नहीं संभाल सकते जिसका वास्ता रिलायंस इंडस्ट्रीज से हो। यह व्यक्तिगत हित और ईमानदारी की विफलता का मामला है।

केंद्रीय मंत्री बनने से पहले रवि शंकर प्रसाद मार्च 2011 से जेपीसी के सदस्य थे। जेपीसी दूरसंचार और स्पेक्ट्रम के आबंटन और लाइसेंस के मूल्य निर्धारण संबंधित मामलों की जांच करती है। मनीष तिवारी अक्तूबर 2012 से मई 2014 तक कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री रहते हुए मनीष तिवारी ने भी अपने कार्यकाल में आरआइएल रिटेनरशिप समझौता किया। जब रिटनेरशिप समझौते की अवधि 30 जून 2012 को खत्म हो गई तो मनीष तिवारी ने राज्यसभा सदस्य और रिलायंस के मुख्य कार्यकर्ता परिमल नटवानी को पत्र लिखकर रिटेनरशिप की अवधि 30 जून 2015 तक बढ़ाने की सिफारिश की।

मनीष तिवारी की अपील के बाद रिटेनरशिप की अवधि 30 जून 2014 तक बढ़ा दी गई। भुगतान रिटेनरशिप फीस के रूप में हुआ। आप ने यह भी आरोप लगाया है कि मनीष तिवारी जेपीसी सदस्य भी रह चुके हैं। इन दोनों मामलों से सवाल उठते हैं। इस तरह के पूर्व मंत्रियों और सांसद जो विभिन्न समितियों के सदस्य रहे हैं वे रिलायंस ग्रुप जैसी कंपनियों के निजी लाभ के लिए अनियमितता बरतते रहे हैं। संसद में भी ये पूर्व मंत्री और सांसद रिलायंस ग्रुप जैसी कंपनियों की वकालत करते देखे गए हैं। पूरा मामला भ्रष्टाचार और निजी हित का है। आम आदमी पार्टी के सांसद इस मामले को संसद की आचार समिति क े समक्ष भी अठाएंगे।

विधायक गुंजल ने चिकित्सा अधिकारी को एक कर्मचारी को नहीं हटाने को कहा था। इस कर्मचारी पर गबन का मामला था और उसे ब्लाक चिकित्सा अधिकारी ने उस स्थान से हटा दिया था। गुंजल चाहते थे कि उनका पसंदीदा अधिकारी उसी स्थान पर रहे। इसे लेकर ही गुंजल ने जिले के मुख्य अधिकारी डाक्टर आरएन यादव से सिफारिश की थी। इस पर अमल नहीं होने पर ही गुंजल आपा खो बैठे और यादव को बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली। इससे घबराकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी यादव ने जिले के पुलिस कप्तान से अपनी और परिवार की सुरक्षा की गुहार की है। विधायक ने अधिकारी डाक्टर यादव के साथ टेलीफोन पर गाली-गलौच के साथ ही कई ऐसी बुरी बातें कहीं जिनसे भाजपा नेताओं को शर्मसार होना पड़ रहा है।

उन्होंने डाक्टर यादव की ‘चमड़ी उधेड़ने’ और ‘काला मुंह’ करने तक की धमकी के साथ ही ऐसा खौफ पैदा करने की बात कही जिनसे उनके बच्चों को भी नींद नहीं आएगी।

विधायक गुंजल की सरकारी अधिकारी को धमकी देने का मामला सामने आने के बाद सरकारी अमले के साथ ही भाजपा संगठन सकते में आ गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी ने गुरुवार को यहां कहा कि इस पूरे मामले की विस्तार से जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में विधायक की अनुशासनहीनता सामने आई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि उन्हें इस मामले में अभी तक दोनों पक्षों से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है।

विधायक गुंजल की पिछले शासनकाल में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से भी अनबन हो गई थी। इसके कारण उन्हें भाजपा से निकाल दिया गया था और गुंजल ने 2008 का विधानसभा चुनाव भी पार्टी के खिलाफ लड़ा था। उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में शामिल कर कोटा उत्तर से टिकट देकर विधायक बनाया गया था। कोटा की भाजपा राजनीति में गुंजल का अलग ही खेमा है और सांसद ओम बिरला व विधायक भवानी सिंह राजावत के विरोध में खड़े रहते हैं। शहरी निकाय चुनाव में भी गुंजल ने बगावती तेवर अपनाकर अपने समर्थक को बागी के तौर पर उपमहापौर का चुनाव लड़वाया था। इस मामले को प्रदेश नेतृत्व ने अनदेखा कर दिया था।

 

 

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