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किसान आंदोलन: ”पूछ लेते वो मिजाज मेरा…बड़ा आसान होता इलाज मेरा”, अजय आलोक ने विपक्ष पर शायराना अंदाज में किया हमला

आज किसानों और सरकार के बीच नौवें दौर की बातचीत हुई जो कि फिर से बेनतीजा रही।

demandअपनी मांगों को लेकर धरना पर बैठे किसान।फाइल फोटो।

आज तक पर डिबेट के दौरान जेडीयू नेता अजय आलोक ने शायराना अंदाज में विपक्ष पर हमला बोला। अजय आलोक ने कहा, ”पूछ लेते वो मिजाज मेरा, बड़ा आसान होता इलाज मेरा। सरकार को पहली कुछ बैठकों में ही समझ लेना चाहिए था कि अकाली, कांग्रेसी, AAP और कुछ किसान संगठनों का मिजाज क्या है। सरकार मिजाज जान जाती तो इलाज बहुत आसान होता। इनको किसी की माननी नहीं है कानून वापिस लिए बिना मानेंगे ही नहीं। इनकी बस यही जिद है कि कानून वापिस लो। इन्हें और किसी चीज से फर्क नहीं पड़ता। अजय आलोक ने कहा कि जब तक पंजाब चुनाव नहीं होगा तब तक आंदोलन खत्म करने की कोई इच्छा नही हैं। विपक्ष को अपने राजनीतिक हित के बारे में खुलकर बोलना चाहिए। पहले कहा सुप्रीम कोर्ट की बात मानेंगे फिर कहा नहीं मानेंगे। सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाया जा रहा है। विपक्ष को बताना चाहिए कि इन तीन कानूनों से क्या दिक्कत है?

मालूम हो कि दिल्ली की सीमा पर डटे हजारों किसान कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि वह कानून से बिचौलियों को खत्म कर देगी वहीं किसानों का कहना है कि ये कानून किसानों को कॉरपोरेट के भरोसे छोड़े देंगे और एमएसपी को खत्म कर देंगे।

आज किसानों और सरकार के बीच नौवें दौर की बातचीत हुई। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कानून को लागू होने से रोक दिया था। आज भी सरकार और किसानों के बीच बातचीत बेनतीजा रही। किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा,” मीटिंग पूरी तरह से नाकाम रही। हमने सुझाव दिया कि सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम में किए गए बदवाल को वापिस ले न कि उसे पूरी तरह खत्म करे।लेकिन कृषि मंत्री ने इस पर कुछ नहीं कहा।”

अब अगले दौर की बातचीत 19 जनवरी को होगी। किसानों की योजना है कि वे 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड करेंगे। किसान नेता ने जोर देकर कहा कि परेड तो होकर रहेगी। 40 किसान नेताओं ने कहा कि वे केंद्र के साथ बातचीत को जारी रखना चाहते हैं। किसानों ने समिति का नाम लिए बिना कहा कि हमें बीच में कोई ब्रोकर नहीं चाहिए।

किसानों का कहना है कि वे समिति के आगे पेश नहीं होंगे क्योंकि समिति के सभी सदस्य कानूनों के मुखर समर्थक रहे हैं। हालांकि सरकार ने इस बात पर सहमति जताई है कि वह किसानों से बातचीत करेगी। कृषि मंत्री तोमर ने कहा,”सरकार और किसान समस्या के समाधान पर विचार करते रहेंगे। लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी मानेगी।” किसानों ने इस बीच पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग भी की है।

 

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