किसान नेता बोले- हमने राम मानकर सत्ता पर बिठाया लेकिन ये तो रावण निकले, BKS के कृष्णबीर ने कहा- सड़क पर बैठकर हल नहीं निकलते, इनकी मंशा समाधान की नहीं

भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष कृष्णबीर चौधरी ने कहा कि सड़क पर बैठकर कानून वापसी की बात करना ठीक नहीं है।

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न्यूज चैनल 'आज तक' के शो दंगल में डिबेट हुई, जिसमें किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने सरकार पर निशाना साधा। (एक्सप्रेस फोटो)

देश में सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में किसान आंदोलन के नेता राकेश टिकैट ने कहा है कि हम लखनऊ को दिल्ली बना देंगे। यानी लखनऊ को भी दिल्ली की तरह घेरा जाएगा।

इस मुद्दे को लेकर न्यूज चैनल ‘आज तक’ के शो दंगल में डिबेट हुई, जिसमें किसान नेता चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमने तो इनको राम मानकर सत्ता पर बिठाया था, लेकिन ये तो रावण निकले। ये माना जाता है कि रावण को मारने के लिए उसकी नाभि पर हमला किया गया, इसी तरह सरकार की नाभि वोट है, उस पर चोट होगी।

उन्होंने कहा कि जब तानाशाही सरकार सत्ता के नशे में गलत नीतियां बनाती है और किसानों को कुचलने का काम करती है, तो उसको हटाने का कर्तव्य देश की जनता का है। चूंकि अब यूपी में चुनाव होने वाले हैं, तो वोट की चोट के माध्यम से इन्हें हटाया जाएगा।

पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि मैं अपने गांव से लौटकर आ रहा हूं, जहां लोग बात कर रहे थे कि उनके पास खाद नहीं है, धान का सही मूल्य नहीं मिल रहा है, आवारा पशुओं ने परेशान कर रखा है, बिजली के दाम बढ़े हुए हैं। ऐसे में जनता के बीच भयंकर नाराजगी है।

पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि मैं अपने किसान भाइयों से अपील करना चाहता हूं कि वे गोदी पार्टियों से बचें। गोदी पार्टियों को वोट नहीं देना है।

वहीं इस मुद्दे पर भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष कृष्णबीर चौधरी ने कहा कि सड़क पर बैठकर कानून वापसी की बात करना ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस देश का किसान तो अपने खेत में काम कर रहा है और इस देश की जनता का पेट भर रहा है। दुर्भाग्य तो ये है कि जब-जब देश के किसानों की बात होती है, तो इसे राजनीतिक दल कैप्चर कर लेते हैं और वहां राजनीति होने लगती है।

उन्होंने कहा कि ये शुद्ध रूप से राजनीति में परिवर्तित आंदोलन है और इसमें कोई दो राय नहीं है। सरकार ने जो 11 दौर की बातचीत की थी, वो समाधान करने के लिए की थी। अगर इन लोगों का बात करने का मन होता तो सरकार तो कह ही रही है कि आप जब मिलना चाहते हैं, तब आइए। लेकिन जब ये रवैया अपनाया जाता है कि संसद में बनाए कानूनों को सड़क पर बैठकर वापस लें तो ये रवैया किसी भी लोकतांत्रिक देश में ठीक नहीं है।

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