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गुलाम नबी आजाद ने जब नरसिम्हा राव की कार्यप्रणाली पर दागे थे सवाल, कहा था- आप इतिहास के सबसे खराब कांग्रेस चीफ, छोड़ दें पद

यहां तक कि आजाद ने राव से दो टूक यह तक कह दिया था कि वह इतिहास के सबसे खराब कांग्रेस चीफ हैं। ऐसे में उन्हें यह पद त्याग देना चाहिए।

Congress नेता गुलाम नबी आजाद ने नरसिम्हा राव की कार्यशैली पर सवाल उठाने से जुड़ा किस्सा समाचार चैनल Aaj Tak के कार्यक्रम ‘सीधी बात’ में सुनाया। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

Congress के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद ने कभी पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के काम करने के तौर-तरीकों पर सवालिया निशान लगा दिए थे। यहां तक कि उन्होंने राव से दो टूक यह तक कह दिया था कि वह इतिहास के सबसे खराब कांग्रेस चीफ हैं। ऐसे में उन्हें यह पद त्याग देना चाहिए।

आजाद ने यह किस्सा हिंदी समाचार चैनल Aaj Tak के Seedhi Baat कार्यक्रम में पत्रकार प्रभु चावला को बताया, “मुख्यमंत्री जब आते थे, तब हम हर वर्किंग कमेटी में यह मुद्दा उठाते थे कि हमारी जिला कमेटियां कहीं नहीं हैं, क्यों नहीं बनाई जातीं…?”

अविश्वास प्रस्ताव पास करने के बाद आजाद द्वारा राव को कुछ कहने पर सवाल हुआ तो कांग्रेसी नेता ने बताया- सब ने रात को तय किया था कि इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास करेंगे, पर किसी की हिम्मत नहीं जुटी थी। सब बोले कि तू-तू-तू…(आजाद के लिए)…मैंने इसी पर कहा कि हम ही कर देते हैं। चार साल पहले हमने ही वर्किंग कमेटी में। मैंने हिंदी में शुरू किया, तो एक नेता ने अंग्रेजी में बोलने के लिए कहा।

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उनके मुताबिक, “मैंने अंग्रेजी में कहा था- मिस्टर नरसिम्हा राव जी, आप हो सकता है कि देश के बेहतरीन प्रधानमंत्रियों में से एक रहे हों, पर आप कांग्रेस के इतिहास के सबसे खराब अध्यक्ष हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि आपकी पार्टी में कोई रुचि नहीं थी। फिर भी आप वहां रहना चाहते थे। अब मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि आप अभी इस्तीफा दे दें।”

आजाद ने तब सीताराम केसरी को कांग्रेस चीफ बनाने की सिफारिश की थी। बोले थे- मैंने इस संदर्भ में कहा, क्योंकि उस वक्त बुरा नहीं माना जाता था। मैं हर मीटिंग में यह कहता था। लेकिन इसके बाद वह मुझे एक-एक पोर्टफोलियो देते थे। मेरे पास तीन पोर्टफोलियो थे। विदेश मंत्री के बजाय मुझे तब उन्होंने अरब देश भेजा। पर मेरी लड़ाई सिद्धांत की थी। कांग्रेस को सतर्क करने की थी।

गुलाम ने यह भी माना कि हालात बदलते हैं। उस वक्त कोई कम्युनिकेशन गैप नहीं था। मैं एक दिन में तब इंदिरा जी के पास तीन-तीन बार गया था।

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