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26 जैन मंदिरों को तोड़कर बनी थी कुतुब मीनार, नहीं कर सकते सेलिब्रेट: तारिक फतेह

'मुगल म्यूजियम' का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी करने के बाद मुगलकालीन इतिहास पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।

Tarik Fatehतारिक फतेह ने कहा कि जो लोग भारत को लूटने आए, आज हम उन्हें अपने बादशाह के रूप में संदर्भित करते हैं, जश्न मनाते हैं। (रॉयटर्स)

यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ द्वारा आगरा में मुगलों की विशेष उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले ‘मुगल म्यूजियम’ का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखने का फैसला सुर्खियों में है। सीएम योगी ने ट्वीट कर कहा था कि ‘आगरा में निर्माणाधीन म्यूजियम को छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से जाना जाएगा। आपके नए उत्तर प्रदेश में गुलामी की मानसिकता के प्रतीक चिन्हों का कोई स्थान नहीं है। हम सबके नायक शिवाजी महाराज हैं।’

यूपी सरकार के इस फैसले के बाद मुगलकालीन इतिहास पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इस पर पाकिस्तान मूल के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक तारिक फतेह ने भी प्रतिक्रिया दी है। कनाडा में रह रहे फतेह ने आजतक के टीवी कार्यक्रम ‘दंगल’ में कहा कि जो लोग भारत को लूटने आए, आज हम उन्हें अपने बादशाह के रूप में संदर्भित करते हैं, जश्न मनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘बाबर ना भारत में पैदा हुआ और ना भारत में मरा। बाबर ने भारत में नफरत फैलाई और हजारों-लाखों लोगों की हत्या कर दी। हम उसे हिंदुस्तान का बादशाह नहीं मान सकते।’

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तारिक फतेह ने कहा कि ताजमहल हिंदुस्तानियों ने बनाया था और दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं जिसने खुद पर हमला करने वालों को सम्मानित किया हो। ऐसा सिर्फ भारत में है। उन्होंने कहा कि मुगलों ने सिखों, हिंदुओं, मुसलमानों और शियाओं पर जुल्म ढहाए। तारिक फतेह ने दावा किया कि दिल्ली में बनी कुतुब मीनार को 26 जैन मंदिरों को तोड़कर बनाया गया। इसका जश्न मनाया जाता है। हमारा आत्मसम्मान होना चाहिए।

फतेह ने कहा कि भारत को पहले सुल्तानों ने तबाह किया, लोगों को मारा। इसके उलट भारत में मुगल-ए-आजम बना दी गई। मुगल शब्द ही ‘दूषित’ है। ये मंगोल से जुड़ा है, ये वो हैं जिन्हें समरकंद में कुछ नहीं मिला तो तैमूर की औलादें यहां (भारत) में आईं और लूटकर चली गईं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी कुतुब मीनार के इतिहास प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने पिछले साल कहा था कि कुतुब मीनार हमारी संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण है। यह एक ऐसा स्मारक है जो 27 मंदिरों को ढहाकर बना था और आजादी के बाद भी यह विश्व धरोहर है। उन्होंने दिल्ली के कुतुब मीनार में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

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