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डिबेट में महिला एंकर पर झल्लाए धर्मगुरू, आप भाव क्यों नहीं समझतीं? रामलला को नहीं देख सकता टाट में

लाइव डिबेट कार्यक्रम में इस पर बहस के दौरान महिला एंकर चित्रा त्रिपाठी पर धर्मगरू स्वामी दीपांकर झल्ला उठे। उन्होंने कहा कि आप मेरे भाव क्यों नहीं समझतीं? मैं रामलला को टाट में नहीं देख सकता।'

Author नई दिल्ली | Updated: October 19, 2019 10:24 PM
धर्मगरू स्वामी दीपांकर और एंकर चित्रा त्रिपाठी।

अयोध्या में दशकों पुराने मंदिर-मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक चली सुनवाई बुधवार को समाप्त हो गई जो इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी कार्यवाही थी। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है और एक महीने के अंदर फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है।

कोर्ट में सुनवाई खत्म होने के बाद फैसले को लेकर तमात तरही की अटकलें लगाई जा रही हैं। मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा जा रहा है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा तो वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि फैसला उनके ही पक्ष में ही आने वाला है। इन अटकलों के बीच न्यूज चैनलों पर भी इस मुद्दे पर जमकर वाद-विवाद चल रहा है। आज तक न्यूज चैनल के लाइव डिबेट कार्यक्रम में इस पर बहस के दौरान महिला एंकर चित्रा त्रिपाठी पर धर्मगरू स्वामी दीपांकर झल्ला उठे। उन्होंने कहा कि आप मेरे भाव क्यों नहीं समझतीं? मैं रामलला को टाट में नहीं देख सकता।’

दरअसल डिबेट के दौरान एंकर ने केस से जुड़े पक्षकारों के बारे में सवाल किया। इस पर धर्मगरू ने कहा ‘कल तक मुस्लिम पक्षकार आपस में लड़ रहे थे तो आज हम दिखा रहे हैं कि हिंदू पक्षकार आपस में लड़ रहे हैं। कभी किसी ने यह सोचा की देस की भावनाएं क्या हैं। तीन दिन से मैं भी अयोध्या में ही था। फैसला क्या होगा यह भगवान जानें लेकिन दिल की इच्छा यही है कि जीतेगी अयोध्या ही। मेरी मानना है कि अब फैसला आना चाहिए और फैसला जो भी हो वह सबको मंजूर होना चाहिए।’

इस पर एंकर उन्हें बीच में ही टोकते हुए पूछती हैं कि आपने कहा कि जीतेगी अयोध्या ही और आप तीन दिन से वहां पर ही थे। इसके जरिए आप क्या बताना चाहते हैं? एंकर के इस सवाल पर धर्मगुरु कहते हैं ‘राम के बगैर न अयोध्या का गुजर है न ही अयोध्या का बसर है। सुप्रीम कोर्ट में जो सुनवाई हुई है उसके बाद मेरा दिल कहता है कि जीतेगी तो अयोध्या ही क्योंकि अयोध्या का अर्थ राम से है। अयोध्या का अर्थ होता है जिसे युद्ध में जीता न जा सके। लेकिन बात यहां अर्थ की नहीं है बल्कि अनर्थ की है। अगर समझौता ही करना था तो रक्त बहाया ही क्यों।’

वह आगे कहते हैं ‘आप देश के भाव को समझिए देश जो चाहता है। मैं नहीं जाता रामलला को देखने। मैं एक बार के बाद दोबारा उन्हें देखने नहीं गया जानती हैं क्यों? क्योंकि मुझे उन्हें टाट पट्टी में नहीं देखा जाता। ये पूरी तरह से हृद्य विदारक है आप भाव क्यों नहीं समझते देश का। आपस में लड़ने की बजाय आप देश का भाव क्यों नहीं समझ पा रहे।’ देखिए डिबेट में आगे क्या हुआ:-

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