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Video: डिबेट के दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल की भाषा पर भड़के पैनलिस्ट, कहा- आरएसएस की विचारधारा अपने पास रखिए

लाइव डिबेट कार्यक्रम 'दंगल' में रिटायर्ड मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ जीडी बख्शी और सीपीआई नेता दिनेश वार्ष्णेय के बीच जमकर बहस हुई। इस दौरान सीपीआई नेता ने बख्शी से कहा कि आप किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्या आपने कभी कमांड में या बटालियन में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया?

Author नई दिल्ली | Updated: October 9, 2019 9:54 PM
रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बख्शी और सीपीआई नेता दिनेश वार्ष्णेय। फोटो: VideoGrab

कांग्रेस ने पहला राफेल लड़ाकू विमान प्राप्त करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की फ्रांस यात्रा और राफेल विमान पर उनके शस्त्र पूजन को बुधवार को ‘तमाशा’ करार दिया और भाजपा पर रक्षा खरीद को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ऐसा तमाशा करने की जरूरत नहीं थी। जब हमने (यूपीए) बोफोर्स की खरीद की थी इस तरह का दिखावा नहीं किया था। हमारे शासनकाल में कोई भी नेता या मंत्री इसे लाने विदेश नहीं गया था।

सिंह ने मंगलवार को फ्रांस के मेरिग्नाक में एक समारोह में फ्रांस निर्मित 36 विमानों के बेड़े के पहले विमान को प्राप्त किया। उन्होंने नए विमान का पूजन किया और इस पर ‘ओम’ लिखा। उन्होंने दो सीट वाले विमान पर उड़ान भरने से पहले फूल और नारियल भी चढ़ाए। इस मुद्दे पर आज तक न्यूज चैनल के लाइव डिबेट कार्यक्रम ‘दंगल’ में रिटायर्ड मेजर जनरल और रक्षा विशेषज्ञ जीडी बख्शी और सीपीआई नेता दिनेश वार्ष्णेय के बीच जमकर बहस हुई। इस दौरान सीपीआई नेता ने बख्शी से कहा कि आप किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्या आपने कभी कमांड में या बटालियन में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया?

दरअसल डिबेट के दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल कहते हैं कि ‘शस्त्र की पूजा अर्चना पहली बार नहीं हुई। इससे पहले भी कई बार शस्त्र पूजा की गई है। हर वर्ष तमाम लड़ाका पलटनों में शस्त्र पूजा होती है। ये आजादी के पहले से और अंग्रेजों के जमाने से होता आ रहा है। और आज कांग्रेस जाग रही है कि यह नॉन-सेक्यूलर है तो उन्हें बहुत पहले जाग जाना चाहिए था। यह सेना की परंपराएं हैं। शस्त्रों की पूजा एक सैन्य जीवन का अहम हिस्सा है।’

इसपर सीपीआई नेता कहते हैं ‘मेरा मानना है कि जनता के टैक्स के पैसे के जरिए आने वाली चीजों पर किसी तरह का पूजा पाठ नहीं होना चाहिए। सरकारी संस्थानों और दफ्तरों में भी पूजा-पाठ नहीं की जाती। आप लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड हुए हैं। क्या आपने कभी अपनी रेजिमेंट में इस भाषा का इस्तेमाल किया। मैं भी डिफेंस फैमिली से हूं। आपकी इस भाषा को भारत की सेनाएं स्वीकार नहीं करती हैं। हमारी देश की सेनाएं बेहद ही प्रोफेशनल तरीके से काम करती है। आप आरएसएस की विचारधार अपने पास रखिए। ये देश की विचारधार नहीं है। आप ये सब बोलकर भारत की सेनाओं का अपमान कर रहे हैं। मैं आपकी तरफ से देश की तीनों सेनाओं से माफी मांगता हूं। ये हमारे देश की भाषा नहीं है जो आज आपने बोली है। देखिए डिबेट में आगे क्या हुआ:-

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