जब टीवी डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता से भिड़ गए बीकेयू के युद्धवीर

किसान नेता ने कहा कि सीएम योगी ने यूपी में बड़े जोर शोर से कहा कि किसानों को गन्ने का भुगतान कर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि कितना भुगतान करना बाकी है।

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किसान कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। (एक्सप्रेस फोटो)।

आज तक पर डिबेट के दौरान एंकर चित्रा त्रिपाठी ने भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के युद्धवीर सिंह से सवाल किया कि जब पंजाब के सीएम ने फसलों के दाम बढ़ाए तो किसान सीएम को लड्डू खिलाने गए, वहीं जब हरियाणा मुख्यमंत्री ने फसल के दाम बढ़ाए तो वहां कोई क्यों नहीं गया? इसका जवाब देते हुए किसान नेता ने कहा कि मुमकिन है कि पंजाब के किसान नेताओं की सीएम से कोई बात हुई हो इसलिए उन्होंने मुंह मीठा करवाया हो। न तो हम पंजाब गए थे मुंह मीठा कराने और न ही हरियाणा जाएंगे।

किसान नेता ने कहा कि सीएम योगी ने यूपी में बड़े जोर शोर से कहा कि किसानों को गन्ने का भुगतान कर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि कितना भुगतान करना बाकी है। किसान नेता बोल ही रहे थे कि तब ही उन्हें बीजेपी प्रवक्ता ने टोकना शुरू कर दिया। जिसके बाद किसान नेता युद्धवीर सिंह भड़क उठे और बीजेपी प्रवक्ता को समझाने लगे।

वहीं, आज पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह शिरोमणि अकाली दल (शिअद) सांसद हरसिमरत कौर बादल पर कृषि कानूनों को थोपने में केंद्र के साथ मिलने होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी संकट को टाल सकती थी जब वह केंद्र सरकार का हिस्सा थी।

बठिंडा की सांसद ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पर केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की भाषा बोलने का आरोप लगाया था क्योंकि सिंह ने कथित रूप से कहा था कि किसानों का आंदोलन राज्य के आर्थिक विकास में बाधा बन रहा है।

बादल की पार्टी ने कृषि कानूनों को लेकर भाजपा से नाता तोड़ लिया था जिसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया था। मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक बयान में कहा, “किसी भी अकाली नेता, खासकर पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल को कृषि कानूनों से उत्पन्न संकट पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है, जिसे तब आसानी से टाला जा सकता था जब वे केंद्र सरकार का हिस्सा थे।”

बादल की टिप्पणी का उपहास उड़ाते हुए सिंह ने कहा कि अगर इसे केंद्र और पड़ोसी हरियाणा में सत्ताधारी पार्टी पर छोड़ दिया गया होता तो किसान अपनी आवाज सुनाने के लिए दिल्ली की सीमा तक नहीं पहुंचते।

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