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किसान था, है और रहेगा, सरकार का तो अता-पता भी नहीं…BJP नेता के सामने बोल गए टिकैत, देखें फिर क्या हुआ?

पिछले साल सितंबर में बने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान गत नवंबर से ही दिल्ली की सीमा पर तीन स्थानों- सिंघू, टिकरी और गाजीपुर- पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा और किसान नेता राकेश टिकैत में हुई बहस (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

आज तक से बातचीत के दौरान भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार को बिना किसी शर्त के किसानों के साथ बातचीत करनी चाहिए। कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा भी मौजूद थे। पात्रा के सामने ही टिकैत कहने लगे कि किसान था, है और रहेगा। सरकार का तो अता-पता भी नहीं है कि कल रहेगी या नहीं। संबित पात्रा टिकैत को जवाब देते हुए कहने लगे कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बड़ी विनम्रता से किसानों से आग्रह किया है कि वे कृषि कानूनों के हर क्लॉज को लेकर सरकार से बात करें।

चैनल से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने कृषि कानूनों को लेकर बातचीत के लिए कई शर्तें किसानों के आगे रख दी हैं। ऐसे में जब शर्तें रख दी हैं तो बातचीत कहां से होगी। टिकैत ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब जज वकील बनकर पैरवी करेंगे तो सजा तो होनी ही है। बता दें कि किसान संगठन 22 जुलाई से तीन कृषि कानूनों के खिलाफ संसद के सामने प्रदर्शन करेंगे। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ने कहा, ‘‘ हमने पुलिस को सूचित किया कि मॉनसून सत्र के दौरान प्रतिदिन 200 किसान सिंघू बॉर्डर से संसद प्रदर्शन करने जाएंगे। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा और प्रदर्शकारी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बिल्ले लगाएंगे।’’

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में बने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान गत नवंबर से ही दिल्ली की सीमा पर तीन स्थानों- सिंघू, टिकरी और गाजीपुर- पर प्रदर्शन कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा करीब 40 किसान संगठनों का सामूहिक मंच है, जो केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है।

गौरतलब है कि आज से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो गया है और 13 अगस्त को इसके समापन की तारीख तय की गई है। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दलों ने रणनीति बनाई है। आज केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों सहित विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ गई।

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