नए बिल के बाद पार्षद जितनी रह जाएगी केजरीवाल की हैसियत? सवाल पर बोले सुधांशु त्रिवेदी- राज्य नहीं है दिल्ली

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने संविधान में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्र ने दिल्ली सरकार की किसी भी तरह की शक्ति में कोई कटौती नहीं की है।

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भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी। (ANI)

आज तक पर डिबेट के दौरान एंकर रोहित सरदाना ने बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी से पूछा कि कल संसद में सांसद संजय सिंह ने केंद्र के लाए कानून का जमकर विरोध किया। नए कानून से दिल्ली में चुनी हुई सरकार की हैसियत महज निगम पार्षद जितनी रह जाएगी? एंकर ने बीजेपी प्रवक्ता से पूछा कि क्या आप सच में केजरीवाल सरकार का पावर कट कर देना चाहते हैं?

इसका जवाब देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सरकार ने संविधान में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्र ने दिल्ली सरकार की किसी भी तरह की शक्ति में कोई कटौती नहीं की है। 1991 के कानून को लेकर कहीं ना कहीं अस्पष्टता थी। जिसे लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार में टकराव होता था। क्योंकि दिल्ली देश की राजधानी है, होता यह था कि आम आदमी पार्टी के लोग हर राष्ट्रीय मुद्दे पर आकर बैठ जाते थे जबकि कई बाकी राष्ट्रीय पार्टियां आम आदमी पार्टी से बड़ी पार्टी हैं।

त्रिवेदी ने कहा कि दिल्ली एक राज्य नहीं है दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है जिसकी अपनी विधानसभा है। जिन बिंदुओं पर भ्रम की स्थिति थी उनको भी स्पष्ट किया गया है। इस पर एंकर ने सवाल किया कि अगर दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप की सरकार बन जाती तो क्या फिर आप दिल्ली को राज्य बना देते?


इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी ने 2 विधानसभा चुनाव जीते हैं तो पिछले 2 लोकसभा चुनाव में पार्टी की एक भी सीट दिल्ली में नहीं आ पाई है।

त्रिवेदी ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश की राजधानी में कानून प्रशासन केंद्र के ही हाथ में होता है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जब केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे थे तो उन्होंने लोकपाल बिल में राष्ट्रपति से लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के मंत्रियों तक की जांच करने को भी शामिल कर लिया था।

एंकर ने कहा कि मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी को केजरीवाल की लोकप्रियता से डर लगता है? इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आम आदमी पार्टी और केजरीवाल का स्वभाव ही उद्दंडता करने का है।

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