अहमदाबाद विमान दुर्घटना का शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया, लेकिन विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने इसको लेकर कोई रिपोर्ट जारी नहीं की। इस तरह ब्यूरो अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) द्वारा निर्धारित अंतिम या अंतरिम रिपोर्ट के लिए 12 महीने की समय सीमा को पूरा करने में विफल रहा।

12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। इनमें विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की जान गई, जबकि 1 यात्री जीवित बचा था। इसके अलावा, विमान जिस मेडिकल कॉलेज परिसर पर गिरा था, वहां 19 लोगों की मौत हुई थी।

इस दुर्घटना के एक साल बाद सीता पटनी और अमांडा डोनाघे शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज के छात्रावास भवनों के जले हुए अवशेषों के पास एक-दूसरे के बगल में बैठी अपने बेटों के लिए शोक मना रही थीं।

ब्रिटिश नागरिक डोनाघे ने अपने बेटे की तस्वीरों का एक कोलाज पकड़ा हुआ था जिस पर “फिओंगल की यादें (Memories of Fiongal)” लिखा था। उन्होंने हाथ जोड़कर शोक संवेदनाएं स्वीकार कीं। 39 वर्षीय फिओंगल ग्रीनलाव-मीक और उनके साथी 45 वर्षीय जेमी भारत में अपनी शादी की सालगिरह मनाने के बाद लंदन लौट रहे थे। पिछले साल 12 जून को एयर इंडिया के अहमदाबाद-गैटविक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त होने से मारे गए 241 लोगों में वे भी शामिल थे।

सीता पटनी का 13 वर्षीय बेटा आकाश, परिवार के चाय के स्टॉल के पास फुटपाथ पर सो रहा था, तभी विमान पास ही में बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल मेस में जा गिरा। विमान दुर्घटना में जलते हुए मलबे के टुकड़े आकाश पर गिरे, जो जमीन पर मारे गए 19 लोगों में शामिल था। पटनी के हाथ पर अभी भी जलने के निशान हैं। यह निशान उनको अपने बेटे को बचाने की कोशिश पड़े थे। शुक्रवार को शोक संतृप्त मां के पीछे आकाश की तस्वीरें लगी थीं और लोग श्रद्धांजलि देने आ रहे थे। एक बड़े पोस्टर पर न्यू लक्ष्मीनगर फ्लैट्स में शुक्रवार शाम को भजन कार्यक्रम की घोषणा की गई थी, जहां परिवार रहता है, जो दुर्घटनास्थल से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है।

शुक्रवार को अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में दुर्घटनास्थल पर इस त्रासदी के कई पीड़ितों के परिवार के सदस्य और प्रियजन दुर्घटना की पहली बरसी मनाने के लिए एकत्रित हुए। पुलिस ने परिवार के सदस्यों को पुलिस घेरा पार करके घटनास्थल में जाने की अनुमति दी। अभी भी मौजूद मलबे के ढेर के बीच से रास्ता बनाते हुए, शोक संतृप्त लोग मिट्टी, जले हुए धातु और रबर के ढेरों के पास गए और शोक जताया।

बेज रंग का चोगा पहने डॉ. सलीम मिस्टर भरूच से ट्रेन से अपनी पत्नी साजेदा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे, जो विमान में यात्री थीं। उमस भरी दोपहर में घटनास्थल की ओर चलते हुए उनके चेहरे का पसीना आंसुओं में मिल गया। वे कहते हैं कि एक साल हो गया… वह मेरी बेटी के साथ रहने वाली थी, जो गर्भवती थी और लंदन में रहती थी। उनके तीन बेटियं हैं। जिनमें से दो लंदन में रहती हैं, और एक बेटा है जो कनाडा में रहता है।

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मुझे जांच रिपोर्ट का इंतजार है कि अंतिम जांच रिपोर्ट में क्या सामने आएगा… पायलट ने स्वाभाविक रूप से अंत तक (यात्रियों को) बचाने की कोशिश की होगी, और उसकी अपनी जान भी खतरे में थी।

इस हादसे में अपनी पत्नी को खोने वाले एक अन्य व्यक्ति थे गुंजनकुमार नारन चौधरी। उनकी पत्नी जयमिनी अपने माता-पिता से मिलने लंदन से भारत आई थीं और ब्रिटेन लौट रही थीं, तभी यह दुखद घटना घटी। उस समय वह दो महीने की गर्भवती थीं।

गुंजनकुमार नारन चौधरी कहते हैं कि 8 जून को मैंने जयमिनी के लिए वलसाद के पटेल बेकरी से जन्मदिन का केक मंगवाया था, जहां वह अपने माता-पिता से मिलने गई थी। वह 12 जून को लंदन वापस आने वाली थी। उस दिन मैंने सब कुछ खो दिया- 12 साल की मेरी साथी और मेरा वह बच्चा जो अभी पैदा भी नहीं हुआ था। दुर्घटनास्थल जाते वक्त चौधरी के आंखों में आंसू थे। लगभग पैंतीस वर्ष के चौधरी गांधीनगर के कलोल से अपनी पत्नी की तस्वीर लेकर आए और घटनास्थल पर प्रार्थना की।

यह दंपति पिछले 12 वर्षों से साथ थे। दो साल की सगाई और 10 साल की शादी। उन्होंने शुरू में ब्रिटेन में बसने की योजना के चलते बच्चे पैदा करने का विचार टाल दिया था। 2022 में दोनों को वहां नौकरी मिल गई। गुंजन को एक केमिस्ट्री कंपनी में और जयमिनी को एक स्वास्थ्य सेवा कंपनी में।

चौधरी कहते हैं कि 8 मई, 2025 को जयमिनी 2022 में भारत छोड़ने के बाद पहली बार घर आई थी। मैं 2024 में एक बार उससे मिलने गया था, इसलिए यह मेरी दूसरी यात्रा थी। जब से हम साथ थे, हमने एक पल भी एक-दूसरे से अलग नहीं बिताया था, लेकिन छुट्टी न मिलने के कारण मुझे ब्रिटेन जल्दी वापस जाना पड़ा, इसलिए मैं 21 मई को रवाना हो गया और जयमिनी को 12 जून को आना था। यह पहली बार था जब मैं उससे अलग हुआ था, और फिर यह घटना घटी।

फिल्म निर्माता मिलन शर्मा अपने परिवार के साथ हादसा स्थल पर पहुंचे और हॉस्टल की चारदीवारी पर अपनी बहन अंजू की तस्वीर लगाई। एक साल पहले मिलन और अंजू वडोदरा से अहमदाबाद पहुंचे थे, जहां से उन्हें अलग-अलग जगहों के लिए उड़ान भरनी थी। मिलन काम के सिलसिले में मुंबई जा रहे थे, जबकि अंजू अपनी बड़ी बेटी निम्मी से मिलने लंदन जा रही थीं। मिलन को याद है कि उनकी बहन ने दोपहर 1:09 बजे सोशल मीडिया पर एक स्टेटस लगाया था, जिसमें लिखा था, “आदमी कुछ नहीं, एक खिलौना है।” यह उनका आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट साबित हुआ।

मिलन ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मुंबई के लिए मेरी फ्लाइट सुबह 11.45 बजे थी और अंजू की फ्लाइट, एआई 171, दोपहर 1.10 बजे की थी, लेकिन उसमें देरी हो गई। मैं दोपहर 1.15 बजे मुंबई में उतरा और जब मैं दोपहर 1.50 बजे एयरपोर्ट से बाहर आया, तब मुझे दुर्घटना के बारे में पता चला।”

56 वर्षीय अंजू नौ भाई-बहनों में से एक थीं। आठ बहनें और एक भाई। उनके बुजुर्ग माता-पिता हरियाणा में रहते हैं। उन्होंने 2021 में अपने पति को खो दिया था और उनकी दो बेटियां हैं- निम्मी, जो यूके में रहती हैं, और हनी, जो भारत में हैं।

मिलन को याद है कि फ्लाइट में उनकी अंजू दीदी से बात हुई थी। उन्होंने मसाला डोसा ऑर्डर किया था, लेकिन उनका उसे खाने का मन नहीं था। मिलन बताते हैं कि अंजू दीदी ने एयरपोर्ट से हमारी मां को वीडियो कॉल किया, लेकिन वो कॉल उठा नहीं पाईं और उन्हें आज भी इस बात का अफसोस है।

ऑटो रिक्शा चलाने वाले मुकेश पटनी अपनी 68 वर्षीय मां जीवीबेन को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। जिनका पोस्टर दुर्घटनास्थल के बाहर लगा हुआ था।

मुकेश पटनी कहते हैं कि मेरी मां पास ही एक छोटी सी झोपड़ी में रहती थीं। जब विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, तब वह अकेली थीं और खाना बना रही थीं। मुझे सोशल मीडिया से दुर्घटना की खबर मिली और मैं तुरंत वहां पहुंचा, लेकिन तब तक मेरी मां मर चुकी थी। पटनी कहते हैं कि आज मैं अपनी मां और दुर्घटना में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने आया हूं। हमें मुआवजा मिल गया है, लेकिन हम दुर्घटना का कारण जानना चाहते हैं। जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।

शुरुआती आगंतुकों में भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून भी शामिल थीं, जिन्होंने बंद द्वारों के बाहर फूलों का गुलदस्ता रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दुर्घटना में 52 ब्रिटिश नागरिकों की मृत्यु हुई थी। एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति विश्वास कुमार रमेश भी ब्रिटिश नागरिक थे।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा भी आगंतुकों में शामिल थीं, जो अपने पिता के निधन स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंची थीं।

जैसे-जैसे सूरज ढलने लगा, उस स्थान पर लोगों की संख्या बढ़ने लगी, क्योंकि परिवार अपने साथ तस्वीरें लेकर आने लगे। कुछ लोगों ने अपने सिर पर मालाएं पहनी हुई थीं, और उन्होंने उन्हें द्वार के बाहर मुख्य दीवार में बने आले में रख दिया।

कुछ परिवार मेस भवन में गए और ढह चुके ओवरहेड टैंक के नीचे एक कोने में फूल चढ़ाए, जबकि अन्य, परिसर के अंदर प्रार्थना करने के छात्रावासों के पीछे रेत के टीले के ऊपर से होते हुए पार्किंग स्थल में जली हुई कारों और बाइकों के बीच अपना शोक जता रहे थे।

शाम करीब 5:30 बजे तक बड़ी संख्या में परिवार उस स्थान पर एकत्रित हो गए थे। एक तरफ पादरी प्रार्थना कर रहे थे। दूसरी ओर, न्यू लक्ष्मीनगर में भजन कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं।

परिवार के सदस्यों के फूट-फूटकर रोने की आवाजें कभी-कभार गंभीर माहौल को चीर रही थीं। कुछ लोग, जो आपदा के बाद पहली बार उस जगह पर आए थे, उस दृश्य को समझने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पिछले साल वहां आए अन्य लोग उसे समझा रहे थे।

कालिख से ढकी हुई उस शौचालय की इमारत के बाहर गद्दों के ढेर, जले हुए प्लास्टिक के मेज-कुर्सियां, एक साबुत मिक्सर जार, एक पैन और कई रोजमर्रा की वस्तुएं पड़ी थीं। हर घंटे, तीन से चार विमानों के ऊपर से गुजरने की आवाज भारी यातायात की आवाज को दबा देती थीं, जिससे कुछ लोगों का ध्यान ऊपर की ओर जाता था।

दोपहर लगभग 1 बजे एयर इंडिया का एक विमान ऊपर से गुजरा, जिससे वहां जमा हुए स्थानीय लोगों में हलचल मच गई। न्यू लक्ष्मीनगर के एक छोटे लड़के ने कहा कि उस दिन विमान बहुत नीचे से गुजरा था। इलाके के प्रवेश द्वार पर अभी भी “प्रधानमंत्री आवास योजना” का पोस्टर लगा हुआ है, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री रूपाणी की तस्वीर है।

एअर इंडिया विमान हादसे का 1 साल: मां के साथ आखिरी बातचीत याद कर भावुक हुआ बेटा, बोला- ‘हमने परिवार का दिल खो दिया’

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन में बिजनेस मैनेजर पटेल ने कहा, “हमारी हमेशा से एक छोटी सी पारंपरिक बात थी। फ्लाइट में बैठने के बाद, वह अपनी सीट पर बैठकर मुझे फोन करती थीं। वह कहती थीं, ‘हां, मैं फ्लाइट में हूं। बाद में मिलते हैं।’” उन्हें याद है कि उन्होंने अपनी मां से पूछा था कि वह रात के खाने में क्या लेना पसंद करेंगी। उन्होंने बताया, “मैंने उनसे कहा, ‘मैं आपको लेने आऊंगा। बाद में मिलते हैं।’ वह उनसे मेरी आखिरी बातचीत थी।” पढ़ें पूरी खबर।