मुंबई के महावीर नगर में दीक्षित सोलंकी के घर पर इन दिनों एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है। दीक्षित सोलंकी की तस्वीर एक लकड़ी के स्टॉल पर लाल कपड़े से ढककर रखी हुई है। उनके पिता अमृतलाल चुपचाप गुमसुम बैठे हुए हैं। न उन्हें शुभचिंतकों की बातों से कोई फर्क पड़ रहा है और न ही मीडिया के सवालों से।

64 वर्षीय अमृतलाल को बताया जा चुका है कि उनके 32 साल के बेटे दीक्षित सोलंकी की मौत हो चुकी है। दरअसल, ईरान की तरफ से एक टैंकर एमकेडी व्योम पर हमला किया गया था। इस हमले में दीक्षित सोलंकी की जान चली गई। हालांकि, उनका शव अभी तक नहीं मिला है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए दीक्षित के पिता कहते हैं, “मुझे अभी तक अपने बेटे की मौत की कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं मिली है। लगातार मुझे घुमाया जा रहा है। कोई भी सही जानकारी नहीं दे रहा है।”

जानकारी के मुताबिक, 1 मार्च को एमकेडी व्योम पर हमला किया गया था। कहा जा रहा है कि यह हमला ईरान की ओर से किया गया। हमले के बाद टैंकर में आग लग गई और फिर जोरदार धमाका हुआ। जिस समय यह धमाका हुआ, उस वक्त दीक्षित सोलंकी इंजन रूम में मौजूद थे और वहीं उनकी मौत हो गई।

अब इस घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिवार को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उनके बेटे का शव मिला है या नहीं। इस बीच अमृतलाल सोलंकी खुद ही अपने स्तर पर जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जहाज के कुछ क्रू मेंबर से भी बात की है, जो उस हमले में सुरक्षित बाहर निकल आए थे।

अमृतलाल कहते हैं, “मैंने क्रू मेंबर से एक साधारण सा सवाल पूछा था। जब हमला हुआ और पूरा जहाज तहस-नहस हो गया, तो फिर उस धमाके में किसी का शव कैसे बच सकता है? लेकिन सामने से बस अजीब से जवाब मिल रहे थे कि उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि सभी को बाहर निकाल सकें।”

अमृतलाल यह भी बताते हैं कि शिपिंग कंपनी के दो अधिकारी, जिनमें कप्तान भी शामिल थे, हादसे के बाद उनके घर आए थे। उन्होंने कहा था कि दीक्षित ने सांस लेना बंद कर दिया है और जैसे ही कुछ और जानकारी मिलेगी, तुरंत अपडेट दिया जाएगा। कुछ घंटों बाद उन्हें बताया गया कि दीक्षित की मौत हो चुकी है और जल्द ही उनके शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इंडियन एक्सप्रेस ने इस मामले में जहाज के मैनेजर से भी बात की। मैनेजर के मुताबिक, जिस समय हादसा हुआ, दीक्षित सोलंकी इंजन रूम में मौजूद थे। उस वक्त टैंकर पर कुल 21 अन्य क्रू मेंबर भी थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी क्रू मेंबर्स के परिवारों से लगातार संपर्क में रहा जा रहा है और हर जरूरी मदद दी जा रही है।

लेकिन इस समय अमृतलाल सोलंकी की स्थिति बेहद खराब है। वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सके। सोलंकी का परिवार खारवा समुदाय से ताल्लुक रखता है। यह एक गुजराती समुदाय है, जो ज्यादातर समुद्री काम और मछली पकड़ने के पेशे से जुड़ा रहता है। दीक्षित सोलंकी जहाज पर बॉयलर के रूप में काम कर रहे थे और पिछले आठ सालों से इसी क्षेत्र में काम कर रहे थे।

उनकी बड़ी बहन दुबई में रहती हैं। अमृतलाल की पत्नी का पिछले साल अक्टूबर में निधन हो गया था। आखिरी बार दीक्षित सोलंकी अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ही भारत आए थे। अमृतलाल बताते हैं कि उन्होंने ही अपने बेटे को इस नौकरी में लगवाया था। मां के गुजर जाने के बाद परिवार धीरे-धीरे खुद को संभाल रहा था और बड़ी बहन की शादी की तैयारी चल रही थी। लेकिन 1 मार्च को हुए हमले ने परिवार को फिर एक बड़ा झटका दे दिया।

दीक्षित का आखिरी मैसेज था कि वहां युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और वह अपनी शिफ्ट के लिए इंजन रूम में जा रहे हैं। दीक्षित सोलंकी की मौत के बाद देशभर से संवेदनाएं सामने आ रही हैं। भारत की राष्ट्रपति ने भी परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया है और दीक्षित के पार्थिव शरीर को भारत लाने की बात कही है। वहीं, अमृतलाल सोलंकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

इस समय ईरान-इजरायल की जंग भी भीषण रूप ले चुकी है, हर पल समीकरण बदल रहे हैं, मौतें हो रही हैं और तरफ तबाही। सबसे तेज अपडेट के लिए जनसत्ता के लाइव ब्लॉग का रुख करें