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Pathankot Airbase से पकड़ा गया युवक आतंकी नहीं है मानसिक रोगी है

पठानकोट एअरबेस के पास से गुरुवार को पकड़ा गया कानपुर का युवक मानसिक रोगी है न कि कोई संदिग्ध आतंकी। उसके पास से कोई आपत्तिजनक वस्तु भी नहीं बरामद की गई है।

Author कानपुर | Updated: February 13, 2016 1:27 AM
पठानकोट एयरबेस की फाइल फोटो

पठानकोट एअरबेस के पास से गुरुवार को पकड़ा गया कानपुर का युवक मानसिक रोगी है न कि कोई संदिग्ध आतंकी। उसके पास से कोई आपत्तिजनक वस्तु भी नहीं बरामद की गई है। कानपुर पुलिस और पठानकोट पुलिस की मुस्तैदी से सामूहिक जांच-पड़ताल के बाद युवक पर केवल आवारापन की धारा लगाई गई है। कानपुर पुलिस ने पठानकोट में पकड़े गए युवक शाकिर की पूरी जांच-पड़ताल के बाद उसकी मां और भाई को उसे लेने पठानकोट रवाना किया है। वे अपने साथ उसका वोटर आइ-कार्ड और उसके मानसिक रोग का इलाज होने के सारे पर्चे लेकर दिल्ली रवाना हुए हैं, जहां से वे पठानकोट कैंट के डिवीजन 2 पुलिस स्टेशन जाएंगे जहां कि शाकिर पुलिस हिरासत में है।

पठानकोट डिवीजन 2 के थाना इंचार्ज भारत भूषण ने बताया कि 11 फरवरी को एअरबेस के पास एअरफोर्स कर्मचारियों ने एक अज्ञात युवक को टहलते हुए देखा। पहले तो एअरफोर्स कर्मचारियों ने उससे पूछताछ की। लेकिन जब वह सही-सही कुछ जवाब न दे सका तो उसे डिवीजन 2 पुलिस स्टेशन की पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने जब उससे पूछा कहां से आए हो तो उसने अपना घर कानपुर बताया। लेकिन घर के पते की सही जानकारी न दे पाया। वह बार-बार यह कह रहा था कि मैं नेपाल जाना चाहता था। गलत ट्रेन में बैठ गया। पुलिस ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास कुछ संदिग्ध नहीं मिला। तब पठानकोट पुलिस ने कानपुर पुलिस से संपर्क किया और उसके बारे में पूछताछ की।

कानपुर पुलिस को शाकिर अली के घर की जानकारी नहीं पता थी तो कानपुर पुलिस ने शाकिर से फोन पर घर और मोहल्ले की स्थिति की जानकारी ली। कानपुर पुलिस के एसएसपी शलभ माथुर को पठानकोट में कानपुर के युवक के पकड़े जाने की जानकारी हुई तो उन्होंने परेड पुलिस चौकी इंचार्ज आद्या प्रसाद वर्मा को इस मामले की जांच सौंपी। वर्मा ने बताया कि उनके पास बस यह जानकारी थी कि लड़का चमड़े की बेल्ट बनाने का काम करता था और उसका भाई होजरी का काम करता है।

इस पर तुरंत उन्होंने होजरी का काम करने वालों के इलाके कर्नलगंज में अपने मुखबिरों और पुलिस कर्मियों की टीम लगाई। चंद घंटे की मेहनत के बाद ही पता चल गया कि शाकिर अली मोहल्ला घसियाना कर्नलगंज का रहने वाला है। पुलिस तुरंत उसकी मां रुख्साना और उसके अन्य रिश्तेदारों को लेकर पुलिस चौकी आई। मां ने बताया कि शाकिर मानसिक रोगी है और उसका शहर के मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। इस संबंध में मां ने शाकिर का मेडिकल रिकार्ड भी पुलिस को दिखाया और उसका वोटर आइ-कार्ड भी पुलिस को सौंपा।

कानपुर पुलिस ने शाकिर की मेडिकल रिपोर्ट और वोटर आइ-कार्ड व्हाटसअप के माध्यम से पठानकोट पुलिस को भेजी और पठानकोट पुलिस ने वोटर आइ-कार्ड से उसके शाकिर होने की पुष्टि की। वर्मा ने बताया कि उसकी मां ने बताया कि शाकिर चार दिन पहले किसी रिश्तेदार के घर जाने को कह कर निकला था। लेकिन पठानकोट कैसे पहुंचा इसकी जानकारी उसके पास नहीं है। फिर वर्मा ने एक चिट्ठी और पठानकोट पुलिस डिवीजन 2 थाने के एसएचओ का फोन नंबर लेकर उन्हें तुरंत पठानकोट जाने को कहा। शुक्रवार को शाकिर की मां और भाई दोनों उसके सभी मेडिकल रिकार्ड लेकर पठानकोट रवाना हो गए।

वर्मा ने बताया कि पुलिस ने शाकिर के पूरे परिवार के इतिहास की खोजबीन कर ली है और वह और उसका परिवार किसी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल नहीं लगता। ये लोग छोटे-मोटे काम कर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं। शाकिर मानसिक रोगी है इसलिए वह किसी तरह से भटक कर पठानकोट पहुंच गया। उधर पठानकोट डिवीजन 2 के एसएसचओ ने बताया कि जब कानपुर पुलिस से शाकिर के बारे में पूरी तरह से पुष्टि हो गई कि वह कोई संदिग्ध नहीं है तो उसे केवल आवारपन की धारा के तहत हिरासत में रखा गया है। उसके परिवार वालों के यहां पहुंचने के बाद और उससे संबंधित कागज दिखाने के बाद उसकी जांच की जाएगी, तब इस बात का फैसला लिया जाएगा कि शाकिर के मामले में क्या करना है। लेकिन अब हम लोग भी उसे संदिग्ध नहीं मान रहे हैं।

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