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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर: गवाह का दावा- डीजी बंजारा ने दी थी बीजेपी नेता हरेन पंड्या की हत्या की सुपारी

खान ने यह भी कहा कि गुजरात में 2002 की हिंसा के बाद दोनों समुदायों को साथ लाने में पांड्या ने काफी मदद की थी। इसलिए उन्होंने सोहराबुद्दीन को कहा कि उसे पांड्या को नहीं मारना चाहिए था।

Author November 4, 2018 5:11 PM
तस्वीर का प्रयोग प्रतीक के तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

सदफ मोदक

सोहराबुद्दीन शेख कथित फेक एनकाउंटर केस में एक गवाह ने दावा किया है कि सोहराबुद्दीन ने उसे बताया था कि गुजरात के पूर्व आईपीएस ऑफिसर डीजी बंजारा ने भाजपा नेता और गुजरात के पूर्व मंत्री हरेन पांड्या की हत्या की सुपारी दी थी। हरेन पांड्या की हत्या वर्ष 2003 में कर दी गई थी। गवाह आजम खान, जो कि सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति का सहयोगी रहा चुका है, ने कहा कि 2010 में उसने इस बारे में सीबीआई जांचकर्ता को बताया था, लेकिन आॅफिसर ने उसके बयान में इसे दर्ज करने से मना कर दिया था। खान ने कोर्ट को बताया, “सोहराबुद्दीन से बात करते समय, उसने मुझे बताया था कि नईम खान और शाहीद रामपुरी के साथ हरेन पांड्या की हत्या का कांट्रैक्ट मिला था और उन्होंने उन्हें मार डाला। मैं उदास हो गया और मैंने सोहराबुद्दीन से कहा कि उनलोगों ने एक अच्छे आदमी की हत्या कर दी। सोहराबुद्दीन ने मुझे बताया कि वह कांट्रैक्ट उन्हें बंजारा ने दी थी।”

खान ने यह भी कहा कि सोहराबुद्दीन ने मुझे बताया था, “ऊपर से यह काम दिया था।” कथित फेक एनकाउंटर केस में आरोपी नंबर 1 बंजारा को ट्रायल कोर्ट ने 1 अगस्त 2017 को बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के आदेश को सीबीआई द्वारा चुनौती नहीं दी गई थी, लेकिन सोहराबुद्दीन के भाई रूबबुद्दीन ने इसे चुनौती दी थी। सितंबर महीने में बाम्बे हाईकोर्ट ने इसे सही ठहराया था। आगे की जांच के दौरान जब खान से यह पूछा गया कि उसने इन तथ्यों को सीबीआई को दिए अपने बयान में क्यों नहीं दर्ज करवाया था, कहा कि उसने सीबीआई ऑफिसर एनएस राजू को ये सब बताया था। गवाह ने कोर्ट में कहा, “मैंने सीबीआई ऑफिसर को बताया था कि हरेन पांड्या की हत्या सोहराबुद्दीन के कहने पर तुलसीराम प्रजापति और एक लड़के द्वारा की गई थी। जब मैंने उन्हें (राजू) को हरेन पांड्या के बारे में बताया तो उन्होंने बोला कि नए बखेड़े में मत डालो।”

खान ने यह भी कहा कि गुजरात में 2002 की हिंसा के बाद दोनों समुदायों को साथ लाने में पांड्या ने काफी मदद की थी। इसलिए उन्होंने सोहराबुद्दीन को कहा कि उसे पांड्या को नहीं मारना चाहिए था। खाने ने कोर्ट से कहा, “मुझे काफी बुरा लगा और कई बार मेरे दिमाग में यह आया कि मुझे सोहराबुद्दीन की कंपनी छोड़ देनी चाहिए।” 26 मार्च 2003 को अहमदाबाद में हरेन पांड्या की हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2007 में गुजरात के एक ट्रायल कोर्ट ने 12 लोगों को हत्या के मामले में दोषी पाया था और उनमें से 9 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में सभी को बरी कर दिया था। गुजरात हाईकोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक याचिका अभी लंबित है।

खान जो कि उदयपुर का रहने वाला एक गैंगस्टर है, को शनिवार (3 नवंबर) को उसे उदयपुर सेंट्रल से कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया था। उसने इससे पहले कोर्ट को बताया था कि उसके उपर आरापियों के पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और इस वजह से उसे गलत मामलों में फंसाया गया। वहीं, सीबीआई ने दावा किया था कि वह कई महीनों से फरार था। पिछले महीने उदयपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। वर्तमान में राजस्थान और गुजरात के पुलिस जवान सहित 22 अाराेपी कथित सोहराबुद्दीन और तुलसीराम एनकाउंटर केस तथा सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसरबी की कथित हत्या के मामले में मुकदमा का सामना कर रहे हैं। खान ने कोर्ट से यह भी कहा कि यह भी कहा कि कैसे वह अपराध की दुनिया में और सोहराबुद्दीन के संपर्क में अाया। उसने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन हैदराबाद के रहने वाले एक गैंगस्टर नईम खान के संपर्क में आया था और आगे वह दाऊद इब्राहिम के संपर्क में आना चाहता था।

खान ने दावा किया कि सोहराबुद्दीन ने इसके बदले नईम को गैंगस्टर छोटा राजन के संपर्क में लाने में कोशिश की। खान ने आगे बताया कि कैसे उसने वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन की हत्या के बारे में सुना था और उसके कुछ दिन बाद वह उदयपुर जेल में तुलसीराम से मिला था। उसने दावा किया कि उसे देखते ही तुलसीराम रोने लगा था और सोहराबुद्दीन की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार ठहरा रहा था।

खान ने बताया कि तुलसीराम ने उसे कहा था कि वह सोहराबुद्दीन के बारे में पुलिस को जानकारी देने में धोखा खा गया। पुलिस वालों ने दावा किया था कि उसे (सोहराबुद्दीन) को गिरफ्तार करने के लिए राजनीतिक दबाव है। खान ने दावा किया, “बंजारा और दूसरे पुलिसकर्मी सोहराबुद्दीन को गिरफ्तार करना चाहते थे। उन्होंने तुलसीराम को भरोसा दिया कि पांच छह महीनों बाद वह जेल से रिहा हो जाएगा। लेकिन, तुलसीराम ने कहा कि गुजरात में एक फार्म हाउस में सोहराबुद्दीन और कौसरबी दोनों मारे गए। इस वजह से तुलसीराम हमेशा बंजारा और चुडासमा सहित अन्य पुलिसकर्मियों को मारने की बात करता था।”

खान ने कहा कि तुलसीराम को आशंका थी कि उसकी हत्या कर दी जाएगी। इसलिए उन्होंने अहमदाबाद कोर्ट के समक्ष एक शिकायत की थी। खान ने कोर्ट को बताया, “मैं वर्ष 2006 में 23-24 दिसंबर को अंतिम बार तुलसीराम में मिला, जब मुझे चोरी के कुछ पुराने लंबित में हिरासत में लिया गया था। उस समय उन्हें (तुलसीराम) एक मामले में कोर्ट सुनवाई कि लिए अहमदाबाद ले जाया जा रहा था। उन्होंने मुझे बताया था कि हम दोनों में से किसी एक को मार दिया जाएगा।” सीबीआई के मुताबिक, अराेपी पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर खान और तुलसीराम को पेंडिंग केस में कस्टडी में लेकर अलग कर दिया था। सीबीआई ने दावा कि कि तुलसीराम गुजरात जाने के दौरान बच निकला था और बाद में एक मुठभेड़ में मारा गया था।

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