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2012 में डॉ कलाम ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए तैयार किए थे दो विरोधाभासी भाषण

राष्ट्रपति चुनाव में उतरा जाए या नहीं, इस पर कलाम ने काफी वक्त तक विचार किया था क्योंकि वह जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते थे।

Author नई दिल्ली | Published on: July 24, 2016 5:57 PM
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम (पीटीआई फाइल फोटो)

ए पी जे अब्दुल कलाम ने वर्ष 2012 में अपने विरूद्ध संख्याबल होने के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव में उतरा जाए या नहीं, इस पर काफी वक्त तक विचार किया था क्योंकि वह जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते थे और उन्होंने अपने फैसले को सही ठहराने के लिए दो विरोधाभासी भाषण तैयार किए थे। उनके एक सहयोगी ने यह खुलासा किया है।

राष्ट्र के नाम संबोधित इन दो पत्रों में एक इस मौके के लिए था कि जब कलाम चुनाव लड़ना पसंद करते और दूसरा तब पेश किया जाता जब वह नहीं लड़ने का फैसला करते। चुनाव लड़ने पर सहमति के लिए कलाम ने जो पत्र तैयार किया था, वह लंबा था।  इस मसौदा पत्र में लिखा है, ‘‘इस लिए मेरे प्यारे भारतीयो, मैंने आप सभी के साथ मिलकर यह चुनाव लड़ने का फैसला किया है। मैं यह अच्छी तरह जानते हुए भी चुनाव में उतरा कि संख्या मेरे विरूद्ध है। मैं भलीभांति यह जानते हुए चुनाव लड़ूंगा कि मेरे पास बहुमत नहीं है। यह पता होने के बाद भी मैं दौड़ में शामिल होऊंगा कि मैं हार जाऊंगा। लेकिन मैंने पहले ही लोगों का दिल जीत लिया है और मैं अब उनके लिए चुनाव लड़ने के लिए कर्तव्यबद्ध हूं। ’’

पत्र में लिखा गया है, ‘‘मेरा किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। मैं किसी भी राजनीतिक विचारधारा का न तो समर्थन करता हूं और न ही विरोध। मैं बस एक वैज्ञानिक हूं और मैं हमेशा चाहता हूं कि मुझे शिक्षक के रूप में याद किया जाए। अब चूंकि मैंने चुनाव का सामना करने का फैसला कर लिया है, मैं उम्मीदवार बन गया हूं। चुनाव में उम्मीदवार को पार्टी नेताओं से मिलकर और उनका समर्थन मांगकर चुनाव प्रचार करना होता है। मेरे पक्ष में वोट जुटाने के वास्ते प्रचार के लिए मेरे पास न तो कोई पार्टी या कार्यकर्ता है। प्रिय भारतीयो, मैं आपसे यानी मेरे लिए प्रचार करने की अपील करता हूं। ’’

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