देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को इसरो के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत सैटेलाइट तकनीक और अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों की मदद से जल संरक्षण और जल प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा।
यह अहम समझौता नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। समझौते के तहत जल शक्ति मंत्रालय और इसरो 24 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे। इनमें जलाशयों की निगरानी, पानी के फैलाव का आकलन और सैटेलाइट के जरिए जांच और नदियों-झीलों में मौजूद प्लास्टिक कचरे का अध्ययन शामिल है।
विकसित राष्ट्र का लक्ष्य
इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में जल सुरक्षा की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि पानी से जुड़ी समस्याओं का समाधान तकनीक, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और लोगों की भागीदारी के जरिए किया जा सकता है।
पाटिल ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार ने जल क्षेत्र में कई शोध परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है। इस दौरान 113 परियोजनाओं को सीधे प्रायोजित किया गया जिनसे जल प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक समाधान विकसित करने में मदद मिली।
इसरो के साथ हुए समझौते के अलावा ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ के तीसरे चरण को भी हरी झंडी दिखा दी गई है। इसके तहत जून 2026 से मई 2027 के बीच देशभर में करीब 2 करोड़ जल संरक्षण संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसरो ने क्या कहा?
इस बारे में अंतरिक्ष विभाग के सचिव नारायणन ने भी कहा कि यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा। इससे जल प्रबंधन में सैटेलाइट आधारित तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
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