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किसानों की ट्रैक्टर रैली आज

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआइकेएससीसी) ने बुधवार को दावा किया कि गुरुवार को होने वाली किसानों की एक्सप्रेस-वे पर ट्रैक्टर रैली की तैयारी पूरी कर ली गई है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 7, 2021 11:33 AM
Tractorअपनी मांगों को लेकर रैली की तैयारी करते किसान। फाइल फोटो।

इस रैली में सभी धरना स्थलों से भारी संख्या में लोग एकत्र होंगे। सूत्रों की मानें तो किसान चार जत्थों में ट्रैक्टर लेकर राष्ट्रीय मार्गों पर जाएंगे। सभी जत्थे को अलग-अलग मार्ग दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, पहला जत्था सिंघू से टिकरी की ओर बढ़ेगा।

दूसरा टिकरी से शाहजहांपुर की ओर, तीसरा गाजीपुर से पलवल की ओर बढ़ेगा, जबकि चौथा जत्था पलवल से गाजीपुर कूच करेगा। सूत्रों की मानें तो बुधरात रात ही सैकड़ों टैÑक्टर एक्सप्रेस वे उतार दिए जाने हैं। हालांकि औपचारिक रूप से इस रैली का समय गुरुवार सुबह 11 बजे रखा गया है। ठंड और बारिश के बाद भी किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे।

एआइकेएससीसी का दावा है कि देश भर में किसानों की सभाएं हुर्इं और भारी जन भागीदारी की संभावना है। संघर्ष समिति का कहना है कि दक्षिण राज्यों के सैकड़ों किसान दिल्ली के इस प्रदर्शन में भाग लेने के लिए आ रहे हैं।

इसके बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में किसान ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और इसी तरह सभी ग्रामीण इलाकों में सभी जिलों में ट्रैक्टर परेड या किसान परेड आयोजित की जाएगी। दिल्ली में बारिश और ठंड का कहर जारी है लेकिन फिर भी किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे।

विवादित कृषि कानूनों के लागू होने के सात महीने और सात दौर की वार्ता के बाद किसानों का सरकार से भरोसा लगभग खत्म हो गया है। किसान नेताओं ने साफ कर दिया कि अगले दौर की वार्ता में भी सीधे-सीधे कुछ नहीं निकलने वाला, क्योंकि सोमवार की वार्ता में मंत्री बेबस दिखे।

किसानों की एकमात्र मांग-तीनों कानून की वापसी है। लिहाजा मजबूरन उन्हें अपना आंदोलन तेज करना पड़ रहा है क्योंकि उनका मानना है कि सरकार की मंशा पूरी तरह ठीक नहीं है। उन्होंने अगली वार्ता की परवाह किए बगैर एक्सप्रेस वे पर ट्रैक्टर मार्च की घोषणा कर दी और दावा किया कि सरकार उन्हें हल्के में न लें।

उन्होंने कहा कि सात जनवरी का ट्रैक्टर मार्च उनके प्रस्तावित 26 जनवरी के किसान गणतंत्र परेड का ट्रेलर समझे सरकार। एआइकेएससीसी ने कई जन कार्यक्रमों की घोषणा भी की है। देश भर में लोग 13 जनवरी लोहड़ी-संक्राति के अवसर पर 3 कानून व बिजली बिल की प्रतियां जलाएंगे। 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाया जाएगा।

23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कार्यक्रम किया जाएगा और जिला व निचले स्तर के धरने व क्रमिक हड़तालें जारी रहेंगी। बता दें कि सरकार और किसान संगठनों के बीच सोमवार को हुई सातवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही थी। दोनों के बीच अब अगली बातचीत आठ जनवरी को होगी।

‘जॉनसन का दौरा रद्द होना केंद्र की कूटनीतिक हार’

किसान संघर्ष समिति ने बयान जारी कर कहा है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भारत दौरा रद्द करना केंद्र सरकार की कूटनीतिक हार है और किसानों की राजनैतिक जीत है।
किसानों को घर छोड़े 40 से ज्यादा दिन हो गए और 60 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हंै। दुनिया भर के राजनैतिक और सामाजिक संगठन इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हंै पर केंद्र सरकार के किसान विरोधी रवैये को देखते हुए ये ट्रैक्टर रैली निकाल रहे हैं।

शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा दे सरकार : एनसीपी

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने बुधवार को किसान आंदोलन में शहीद हुए सभी किसानों के परिवारों को 50 लाख रुपए मुआवजे और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। पार्टी ने नई दिल्ली में बुलाई प्रेस कान्फ्रेंस में तीनों कृषि कनूनों को बिना शर्त वापस करने को भी कहा।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केके शर्मा ने संवाददाताओं से कहा-सरकार किसानों के जज्बात से खेल रही है। केंद्र सरकार को आठ जनवरी के अगले दौर की प्रस्तावित वार्ता में बिना शर्त तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की मौत के लिए आंदोलन नहीं सरकार जिम्मेदार है। वे संयम से शांतिपूर्ण बैठे हैं।

अगर उनका धैर्य टूटता है तो इसके लिए केंद्र सरकार दोषी होगी। इस मौके पर एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का संदेश भी जारी किया जिसमें उन्होंने किसान आंदोलन का समर्थन किया है।

आंदोलनकारियों ने पार्क में धनिया व पालक बोया

सेक्टर 14ए चिल्ला सीमा पर धरना दे रहे भाकियू भानु गुट के 11 किसान बुधवार को भी भूख हड़ताल पर बैठे रहे। दोपहर बाद किसानों ने धरनास्थल के पास ही पार्क में धनिया, पालक, मूली व शलजम की बुआई की। वहीं, दलित प्रेरणा स्थल पर धरना दे रहे भाकियू लोकशक्ति ने बुधवार को केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों को वापस कराए बिना वह धरनास्थल से पीछे नहीं हटेंगे।

विगत करीब 37 दिन सेक्टर 14ए चिल्ला सीमा पर धरना दे रहे, भाकियू भानु गुट के किसानों का धरना बुधवार को भी जारी रहा। पहले के तरह ही बुधवार को भी 11 किसान भूख हड़ताल पर बैठे। दोपहर बाद दो दर्जन से अधिक किसान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरनास्थल के पास पार्क में पहुंचे।

जहां किसानों ने धनिया, पालक, मूली व शलजम की बुआई की। किसानों ने कहा कि ताजी सब्जी सेहत के लिए लाभदायक है और दूसरा सरकार को भी बताना है कि किसान अगर जमीन से गल्ला उगा सकता है, तो किसान विरोधी सरकार को भी गिरा सकता है।

इसके बाद भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि कृषि कानून एक काला कानून है। केंद्र सरकार को इस काले कानून को हर हाल में वापस करना होगा। जब तक कानून वापस नहीं लिया जाएगा वह यहां से नहीं हटेंगे।

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