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मुस्लिम रैली में ममता बनर्जी ने कहा- ये हमारा देश है, तुम ये कहने वाले कौन हो कि पाकिस्‍तान चले जाओ

शाहिद मिनार पर होने वाली इस रैली का आयोजन जमीयत उलेमा ए हिंद कर रही है। बताया जा रहा है कि रैली में बड़ी संख्‍या में टीएमसी के कार्यकर्ता भी शिरकत करेंगे।

वध के लिए जानवरों की खरीद-फरोख्त पर लगी रोक को ममता ने किया खारिज।

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को पहली बार यहां मुस्लिमों की रैली को संबोधित किया। असहिष्‍णुता के मुद्दे पर उन्‍होंने बॉलीवुड अदाकार आमिर खान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्‍होंने वही कहा जो एक भारतीय के तौर पर वह महसूस कर रहे हैं। आमिर का विरोध करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए ममता ने कहा कि आप कौन होते हैं किसी को यह कहने वाले कि पाकिस्‍तान चले जाओ या ये पहनो, वो खाओ…। ये हमारा देश है, हम सबका है, हमारी जन्‍मभूमि है, कर्मभूमि है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा- मैं उनके खिलाफ बोलती हूं, इसलिए वे मेरे पीछे सीबीआई लगा सकते हैं। पर मैं मौत से नहीं डरती। उसे तो एक दिन आनी ही है। मैं सर उठा कर जीना और बेखौफ होकर राजनीति करना चाहती हूं।

शाहिद मिनार पर हुई इस रैली का आयोजन जमीयत उलेमा ए हिंद ने किया था। जमीयत के अंतर्गत राज्य के एक हजार से ज्यादा मदरसे आते हैं। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में ममता बनर्जी मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाकर मुस्लिम वोट बैंक को स्‍पष्‍ट देना चाहती हैं। इसके अलावा वह मतदाताओं को यह भी बताना चाहती हैं कि 34 साल के अपने शासन में कम्‍युनिस्‍टों ने भी उनके लिए कुछ नहीं किया है।

पश्चिम बंगाल में 29 प्रतिशत वोटर मुस्लिम हैं। प्रदेश की 294 सीटों में 140 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स का प्रभाव है। 2009 लोकसभा चुनाव में जमीयत ने बड़ी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई, 2016 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार इलेक्शन के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस भी मुसलमान वोटरों पर नजर लगा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी ने लगभग 6 महीने पहले से ही पश्चिम बंगाल में कैडर बनाना शुरू कर दिया है। बिहार के बाद बीजेपी की स्ट्रैटेजी में पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर था, लेकिन, बिहार में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी अब स्ट्रैटेजी बदल सकती है। वहीं, ममता को डर है कि बीजेपी ध्रुवीकरण कर सकती है। ऐसे में उन्‍होंने अभी से गंभीर प्रयास करने शुरू कर दिए हैं।

पश्चिम में क्‍या है मुस्लिम वोटरों का असर?

पश्चिम बंगाल में 2.4 करोड़ से ज्यादा मुसलमान हैं। 2011 में इन 125 सीटों में से 92 सीटें टीएमसी ने जीती थीं। विश्लेषकों के अनुसार, इन सीटों पर वोटरों का स्विंग किसी भी पार्टी की किस्मत बदल सकता है।

2011 विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों के वोट का खासा असर देखने को मिला था। मुस्लिम वोटरों ने लेफ्ट और कांग्रेस से नाता तोड़कर टीएमसी का साथ दिया था। पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी गठबंधन को 294 सीट में से 227 सीटें मिली थीं।

पश्चिम बंगाल में 20 जिले हैं। साउथ 24 परगना, नॉर्थ 24 परगना, नादिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, कोलकाता, साउथ दिनाजपुर, नॉर्थ दिनाजपुर, जलपाईगुडी में मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है।
इस समय पश्चिम बंगाल असेंबली में मुस्लिमों की भागीदारी 20% है।

2011 के चुनाव में 59 मुस्लिम उम्‍मीदवार विधानसभा में चुनकर आए थे। इनमें 40 एमएलए टीएमसी गठबंधन के थे। 2011 में लेफ्ट पार्टियों से सिर्फ 18 मुस्लिम कैंडिडेट्स ही जीते थे, जबकि, 2006 में उनके पास 34 मुस्लिम विधायक थे।

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