Pawan Khera News: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर कथित बयानबाजी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। इस पर उन्होंने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुझे दी गई राहत बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान के कारण है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में पवन खेड़ा ने कहा, “एक जो राहत मुझे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दी है, ये बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान की ताकत है। आजादी को 75 साल से ऊपर का वक्त हो गया है, लेकिन जब भी कोई साधारण नागरिक सरकारों के दमन के आगे कमजोर महसूस करें या असहाय महसूस करें तो यही बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान उसकी रक्षा में जरूर आता है। मेरी रक्षा में भी आया।”

दमनकारी सरकारों के खिलाफ जनादेश आने वाला है- पवन खेड़ा

पवन खेड़ा ने आगे कहा, “हम लोग पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि दमनकारी सरकारों के खिलाफ एक निर्णायक जनादेश आने वाला है। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और हम सभी लगातार चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग के कान पर जूं नहीं रेंगती है। वो जवाब देना भी सही नहीं समझते हैं। वो घमंड के घोड़े पर सवार हैं। जब भी कोई सवाल उठाए तो चुनाव आयोग और सरकार का कर्तव्य है कि वो सवालों का जवाब दे।”

सुप्रीम कोर्ट को पवन खेड़ा ने दी थी अग्रिम जमानत

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जालसाजी और मानहानि मामले में बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत (anticipatory bail) दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच जारी रह सकती है लेकिन गिरफ्तारी की आवश्यकता पर संतुलन बनाए रखना होगा। इस फैसले से फिलहाल खेड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लग गई है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोप और उनके जवाब में दिए गए सार्वजनिक बयान यह संकेत देते हैं कि विवाद में राजनीतिक तत्व सबसे अहम है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक प्रक्रिया का इस्तेमाल ‘राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के औज़ार’ के रूप में नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को बिना ठोस आधार के खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने यह भी जोड़ा कि गिरफ्तारी कोई अनिवार्य कदम नहीं, बल्कि अंतिम विकल्प होना चाहिए।

पवन खेड़ा को मिली राहत पर आया हिमंता बिस्वा सरमा का पहला बयान

हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स एक पोस्ट में लिखा, “मुझे किसी से भी विशेषकर अभिषेक मनु सिंघवी से लोकतंत्र, सार्वजनिक संवाद या शालीनता पर पाठ की आवश्यकता नहीं है। असली मुद्दा एक महिला से जुड़ा है, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय टेलीविजन पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दूसरे देशों से लाए गए दस्तावेजों से उसकी छवि खराब की गई है।” पढ़ें पूरी खबर…