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‘गाड़ी से बाहर खींच ही लिया था’, सीआरपीएफ अफसर ने बताया पत्थरबाजों से कैसे बचाई जान

श्रीनगर के नौहट्टा मे सीआरपीएफ के जिस वाहन पर बीते एक जून को हिंसक भीड़ ने पथराव किया था उसमें सवार अफसर और ड्राइवर अब सामने आए हैं। उन्होंने मीडिया में कहा है कि भीड़ के तेवर देखकर लग रहा था कि शायद आज उनके जीवन का आखिरी दिन हो जाएगा।

Author नई दिल्ली | June 7, 2018 13:33 pm
नौहट्टा में सीआरपीएफ के वाहन पर कुछ यूं हुआ था हमला(फोटो-ट्विटर @iSKatiyar )

श्रीनगर के नौहट्टा मे सीआरपीएफ के जिस वाहन पर बीते एक जून को हिंसक भीड़ ने पथराव किया था उसमें सवार अफसर और ड्राइवर अब सामने आए हैं। उन्होंने मीडिया में कहा है कि भीड़ के तेवर देखकर लग रहा था कि शायद आज उनके जीवन का आखिरी दिन हो जाएगा। मगर किसी तरह से वह भीड़ के चंगुल से बच निकलने में कामयाब रहे।
सीआरएफ के अफसर एसएस यादव ने ‘आज तक’ से बाचतीत में कहा-भीड़ ने दरवाजा खोल लिया था, पत्थरबाजों ने हमें लगभग बाहर खींच लिया था। मगर पीछे बैठे जवान ने बहुत हिम्मत दिखाकर किसी तरह दरवाजा बंद किया।

लोग गाड़ी पलटने की कोशिश कर रहे थे, मगर सूझबूझ का परिचय देते हुए ड्राइवर धीरे-धीरे गाड़ी चलाता रहा।जिससे भीड़ गाड़ी नहीं पलट सकी।कमांडेंट एसएस यादव ने कहा कि हम उस दिन नोहट्टा में सीआरपीएफ की दो और एमआर गंज में एक कंपनी के सुपरविजन के लिए गए थे। एमआरगंज से लौट रहे थे तो ख्वाजा बाजार के पास भीड़ ने घेर लिया।लौटते समय यह नहीं लगा था कि रोड पर भीड़ है। मगर जैसे ही हम उस रेंज में पहुंचे तो गाड़ी पर पथराव होने लगा।भीड़ दोनों तरफ से गाड़ी को हिला रही थी।

किसी तरह बच निकलने के बाद एसएस यादव ने अपने सीनियर अफसर कमांडेंट रणदीप सिंह को घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक वक्त तो मेरा हाथ बंदूक पर भी चला गया था मगर भगवान से प्रार्थना किया कि इसकी जरूरत न पड़े। मैने साथी जवानों से भी कहा कि जब तक मैं न कहूं, कोई गोली न चलाए। क्योंकि गोली से भीड़ में शामिल लोग मारे जाते।

उस दिन गाड़ी चला रहे 25 वर्षीय ड्राइवर विशाल पवार ने कहा कि हिंसक भीड़ पत्थर ही नहीं बल्कि गाड़ी के सामने साइकिल भी फेंक रही थी,ताकि गाड़ी आगे न बढ़ सके।पथराव इतना तेज था कि सामने कुछ दिख भी नहीं रहा था, जिससे वाहन चलाने में दिक्कत हो रही थी। यह भी नहीं पता चला कि गाड़ी के नीचे कोई आ गया है। ड्राइवर पवार ने बताया कि वायरल वीडियो में जितना दिख रहा है, उससे भी बदतर हालात थे।वाहन को लोग आग भी लगा सकते थे, हमें लगा कि शायद आज जिंदगी का आखिरी दिन है।

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