राज्यसभा में हंगामा करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाई जा सकती है समिति: सूत्र

सरकार ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, को एक लिखित शिकायत भेजी है, जिसमें सांसदों का नाम लिया गया है।

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राज्यसभा में विपक्षी सांसदों और मार्शलों के बीच धक्का-मुक्की हुई थी।(फोटो-पीटीआई)।

राज्यसभा में हंगामा करने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के सांसदों की एक समिति बनाई जा सकती है। सूत्रों से यह जानकारी मिली है। सात या नौ वरिष्ठ सदस्य इस समिति का हिस्सा हो सकते हैं। उन्हें एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें देने के लिए कहा जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि सरकार उन सांसदों पर सख्त कार्रवाई करना चाहती है जिन्होंने मानसून सत्र के दौरान संसद में हंगामा किया। सूत्रों ने कहा कि व्यवधान से करीब 130 करोड़ से अधिक रुपए का नुकसान हुआ है।

रविवार को, सरकार ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, को एक लिखित शिकायत भेजी, जिसमें सांसदों का नाम लिया गया। सात केंद्रीय मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नायडू से मुलाकात की और उन्हें शिकायत दी, जिसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, वाम दलों और आम आदमी पार्टी के 15 से अधिक सांसदों के नाम शामिल हैं।

सांसदों में, कांग्रेस के दीपिंदर हुड्डा, राजमणि पटेल, अखिलेश प्रसाद सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, रिपुन बोरा, सैयद नासिर हुसैन, फूलो देवी और छाया वर्मा हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस से सरकार ने अबीर रंजन बिस्वास, डोला सेन, अर्पिता घोष, शांता छेत्री और मौसम नूर का नाम दिया है। शिकायत में शिवसेना के अनिल देसाई और प्रियंका चतुर्वेदी, वाम दलों के इलामाराम करीम और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह को भी नामजद किया गया है।

इसी तरह की लिखित शिकायत जद (यू), अन्नाद्रमुक, आरपीआई, एनपीपी, एजीपी आदि भाजपा के सहयोगी दलों द्वारा भी दर्ज कराई जाएगी। सरकार के मुताबिक, सांसद टेबल पर चढ़ गए थे और कार्यवाही के दौरान महिला मार्शल को धक्का मारा गया।

विपक्ष ने संसद में पेगासस स्पाइवेयर मुद्दे पर चर्चा करने में अनिच्छा को लेकर सरकार की बार-बार आलोचना की है और इस मुद्दे पर रस्साकशी ने सत्र को बाधित कर दिया था। तीखे गतिरोध के बीच, राज्यसभा ने 11 अगस्त को अराजक दृश्य देखा विधेयक को एक चयन समिति को भेजने की मांग के बावजूद उसे पारित किया गया।

कार्यवाही के सीसीटीवी फुटेज में विपक्षी सदस्यों को राज्यसभा के अंदर सुरक्षाकर्मियों से धक्का-मुक्की करते हुए देखा गया। जहां सरकार ने विपक्ष पर महिला मार्शलों के साथ बदतमीजी करने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने एक संयुक्त बयान में कहा, “बाहरी लोग, जो संसद की सुरक्षा का हिस्सा नहीं थे, उन्हें विपक्षी नेताओं और सदस्यों के साथ हाथापाई करने के लिए लाया गया, जिसमें महिला सांसद भी शामिल थीं, जो केवल विरोध कर रही थीं।”

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