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महाराष्ट्रः मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह समेत 8 के खिलाफ 15 करोड़ की वसूली में FIR

परमबीर सिंह ने एनसीपी के सीनियर नेता और महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद विवाद काफी बढ़ गया था. कुछ ही दिन बाद अनिल देशमुख को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

मुंबई पुलिस ने आईपीएस अफसर परमबीर सिंह, पांच अन्य पुलिसकर्मियों तथा दो अन्य लोगों के विरूद्ध केस दर्ज किया है। एक बिल्डर से उसके खिलाफ मामले को वापस लेने के एवज में 15 करोड़ रुपये की वसूली के सिलसिले में ये एफआईआर दर्ज की गई है। इन पुलिसवालों में मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी अकबर पठान का नाम भी शामिल है।

मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि बिल्डर की शिकायत पर दक्षिणी मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस थाने में यह मामला दर्ज किया है। उन्होंने इस मामले का अधिक ब्योरा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बिल्डर के दो साझेदारों सुनील जैन एवं संजय पूर्णिमा को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। शिकायत के अनुसार जैन और पूर्णिमा ने पुलिस अधिकारियों के साथ साठगांठ कर बिल्डर के खिलाफ कुछ मामलों को वापस लेने की एवज में उससे 15 करोड़ रुपये की मांग की थी।

सूत्रों ने बताया कि बिल्डर ने अपनी शिकायत में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह व अन्य का नाम लिया है। उसके बाद पुलिस ने 15 करोड़ रुपये की वसूली के सिलसिले में ये एफआईआर दर्ज की। एंटीलिया मामले के सामने आने के बाद इसी साल मार्च में परमबीर सिंह को महानिदेशक होमगार्ड बना दिया गया था।

गौरतलब है कि परमबीर सिंह ने एनसीपी के सीनियर नेता और महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद विवाद काफी बढ़ गया था. कुछ ही दिन बाद अनिल देशमुख को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

परमबीर सिंह ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाए थे कि अनिल देशमुख के खिलाफ शिकायत करने के बाद से उन्हें राज्य सरकार की तरफ से कई जांचों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इन मामलों को महाराष्ट्र से बाहर ट्रांसफर किए जाने और सीबीआई से जांच कराने की भी मांग की थी।

परमबीर पर 2015 से 2018 तक तबादला होने के बाद भी सरकारी आवास का इस्तेमाल करने पर 24 लाख का जुर्माना लगा है। परमबीर जब ठाणे के कमिश्नर थे तब 2 सरकारी आवासों का इस्तेमाल कर रहे थे। 24 लाख रुपये का यह जुर्माना उनके वेतन से या सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले पैसो में से वसूला जा सकता है।

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