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एक नाम हटने से क्या, जगह-जगह पसरा है ‘औरंगजेब’

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने गुरुवार रात को राजधानी के सबसे महंगे और शानदार इलाके औरंगजेब रोड के नाम की छुट्टी कर इसे एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया..

Author मुंबई | September 6, 2015 10:21 AM
औरंगजेब रोड अब एपीजे अब्दुल कलाम रोड के नाम से जानी जाएगी। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएसमी) ने शुक्रवार को इस नाम-बदलाव को अपनी मंजूरी दे दी।

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने गुरुवार रात को राजधानी के सबसे महंगे और शानदार इलाके औरंगजेब रोड के नाम की छुट्टी कर इसे एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया। लेकिन एक तारीखी हकीकत यह भी है कि इस ‘बेपीर’ मुगल बादशाह के नाम पर देश में कई और इलाकों, गांव-कस्बों के नाम हैं। देखना है यह है कि नाम बदली का यह सिलसिला कहां तक जाएगा।

2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में तकरीबन 177 गांव, कस्बे इस मुगल बादशाह के नाम पर हैं जिसने 49 साल तक (सन 1707 तक) हिंदुस्तान में हुकूमत की । उसके शासन काल को इतिहासकारों ने अलग-अलग नजरिए से देखा है। पर आम धारणा है कि वह असहिष्णु बादशाह था। इसी कारण राजधानी में कुछ संगठन औरंगजेब रोड का नाम बदलने की मांग करते आए हैं। महाराष्ट्र में औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग भी इसी आधार पर होती रही है। हिंदू संगठन इस शहर का नाम संभाजी नगर करने की मांग करते आए हैं। दिल्ली के औरंगजेब रोड का नाम बदलने के बाद औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग फिर जोर पकड़ रही है। वैसे औरंगाबाद के नाम वाले देश में 63 गांव-कस्बे हैं। इनमें 48 उत्तर प्रदेश में ही हैं।

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बहरहाल औरगंजेब से जुड़े कुछ आम नाम इस तरह हैं- औरंगापुर/पुरा (35), औरंगनगर (तीन), औरंगा (17), औरंगजेबपुर (13), औरंगपोर (सात), औरंगाबेर (एक)।

इस तरह 38 गांव ऐसे हैं जिनका नाम औरंगजेब से जुड़ा है। इनमें औरंगाबाद खालसा, औरंगाबाद डालचंद, औरंगाबाद भोला हुलास और साल्हपुर औरंगाबाद है। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने 29 अगस्त को एक प्रस्ताव पारित कर औरंगजेब रोड का नाम बदलकर एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस नाम परिवर्तन पर एनडीएमसीको बधाई भी दी थी। हालांकि कुछ संगठन इसे इतिहास को विकृत करने का प्रयास बता रहे हैं। यह मामला अदालत तक पहुंच गया है। शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने औरंगजेब रोड का नाम बदल कर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर करने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब भी मांगा है।

भाजपा सांसद महेश गिरि, मीनाक्षी लेखी और आम आदमी पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ के सचिव ने सड़क के नाम में परिवर्तन का आग्रह किया था जिसे एनडीएमसी ने स्वीकार कर लिया था। महेश गिरि ने एक प्रस्ताव पेश कर कहा था कि इतिहास की इस चूक को सुधारने की जरूरत है। परिषद के सदस्यों ने फैसला किया कि औरंगजेब रोड का नामबदलने की जरूरत है, क्योंकि जिस बादशाह के नाम पर यह मार्ग है, वह अपने अत्याचारों और कठमुल्लेपन के कारण जाना जाता है।

उत्तर प्रदेश के बाद जिस सूबे में सबसे ज्यादा औरंगजेब से जुड़े गांव-क्षेत्र हैं, वह महाराष्ट्र है और जहां भाजपा-शिवसेना का राज है। इस राज्य में 26 नाम इस शासक से जुड़े हैं। इस फेहरिस्त में तीसरा नाम बिहार (12) का है जहां अगले दो माह में चुनाव हो सकते हैं।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद की स्थापना 1653 में औरंगजेब ने की थी। महाराष्ट्र के भाजपा और शिवसेना नेता लगातार औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग करते आए हैं। इतिहास विदित है कि औरंगजेब के खिलाफ मराठा शासक छत्रपति शिवाजी लड़ते रहे और एक बार इस मुगल बादशाह ने उन्हें धोखे से आगरा के कारगार में डाल दिया था। यहां से शिवाजी बड़ी चतुराई से निकल पाए थे। इसके बाद वे आजीवन मुगल सल्तनत के खिलाफ लड़ते रहे। शिवसेना का कहना है कि औरंगजेब एक जुल्मी शासक था। वह ‘हिंदुओं के खिलाफ’ था। उसके नाम पर किसी स्थान का नाम रखना ठीक नहीं है।

इसके अलावा सात और राज्य हैं जहां औरंगजेब के नाम पर कस्बों -गांवों के नाम हैं। ये हैं- आंध्र प्रदेश (चार), गुजरात (दो), हरियाणा (सात), मध्य प्रदेश (सात), राजस्थान (एक) उत्तराखंड (तीन) पश्चिम बंगाल (एक)। औरंगजेब का नाम रखने वाले ज्यादातर गांव-कस्बे पूर्व बुंदेलखंड और दकन (दक्षिण) में पड़ते हैं, जहां माना जाता है कि इस बादशाह ने अपने जीवन का ज्यादातार वक्त गुजारा था।

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