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2020 से 2021 के बीच बाढ़ और तूफान से ज्‍यादा लोगों की मौत बिजली गिरने के चलते हुई, पढ़ें चौंकाने वाले आंकड़े

ये मौतें बिजली गिरने की घटनाओं के लगातार बढ़ने का परिणाम हैं। ये एक ऐसा बदलाव है पर्यावरण में जिसे सरकारी आंकड़ों में भी स्वीकार किया गया है।

Thunder-Light| Deaths| UP Bihar
आकाशीय बिजली Photo Credit- Express Archives

उत्तर भारत में मानसून की शुरुआत के साथ ही पिछले सप्ताह बिहार में बिजली गिरने और आंधी-तूफान से जुड़ी घटनाओं में 17 लोगों की मौत हो गई। इनमें से भागलपुर जिले में 6 लोगों की मौत हुई, वैशाली में 3 लोगों की मौत, बांका और खगड़िया में 2 मौतें हुईं और मुंगेर, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा में एक-एक मौत हुई। हालांकि बिजली गिरने से होने वाली मौतों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में रिपोर्ट किया जाता है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में बाढ़ और चक्रवातों की वजह से बेहिसाब मौतें होती हैं, लेकिन इसकी तुलना में कहीं ज्यादा मौते आकाशीय बिजली गिरने से हो जाती हैं।

अर्थ साइंस मिनिस्ट्री, भारतीय मौसम विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों की एक संयुक्त रूप से प्रकाशित वार्षिक लाइटनिंग रिपोर्ट 2020-2021 के अनुसार उत्तर भारतीय राज्यों में बिजली गिरने से 2020 और 2021 के बीच 1,697 लोगों की मौत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर भारत में तीन राज्य, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जहां बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या 1500 से भी ज्यादा हो जाती है। रिपोर्ट में कहा गया ये तीनों राज्य हमारे लिए चुनौती बने हुए हैं। मरने वालों का आंकड़ा एक आधिकारिक डाटा है क्योंकि इन राज्यों में ऐसी मौतों पर मुआवजा भी मिलता है।

लगातार बढ़ रहीं हैं बिजली गिरने से मौत की घटनाएं
संजय श्रीवास्तव ने बताया, जो क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्जर्विंग सिस्टम्स प्रमोशन काउंसिल (CROPC) में काम करता है, जो ऊपर बताई गई लाइटनिंग रिपोर्ट में योगदान देने वाली एजेंसियों में से एक है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में 401, उत्तर प्रदेश में 238, मध्य प्रदेश में 228 और ओडिशा में 156 मौतें हुई हैं। ये मौतें बिजली गिरने की घटनाओं के लगातार बढ़ने का परिणाम हैं। ये एक ऐसा बदलाव है पर्यावरण में जिसे सरकारी आंकड़ों में भी स्वीकार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में बिजली गिरने की घटनाओं में 34% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2019-2020 में 1.38 करोड़ से बढ़कर 2020-2021 में 1.85 करोड़ हो गई, जो पूरे देश में एक वर्ष में 46.83 लाख की वृद्धि है।

डाटा की प्रमाणिकता पर सवाल?
हालांकि सरकारी एजेंसियों जैसे लाइटनिंग रेजिलिएंट कैंपेन इंडिया और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रिकॉर्ड किया है जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौतों की संख्या कम बताई गई है। भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु में उच्च वोल्टेज इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ जीआर नागभूषण ने कहा,”हालांकि देश में मृत्यु दर हर साल 2,000 से 3,000 के बीच है लेकिन ये कोई उचित डेटा नहीं है।” प्रोफेसर नागभूषण के अनुसार, हालांकि सरकारी एजेंसियां ​​​​डेटा रिकॉर्ड करने का प्रयास करती हैं, लेकिन प्रामाणिकता सवालों के घेरे में है। नागभूषण ने आगे बताया, “अगर बिजली गिरने से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो डॉक्टर को मुख्य कारण घोषित करना चाहिए। अगर यह बिजली है तो उन्हें इसकी घोषणा करनी चाहिए और इसे रिकॉर्ड के लिए एक सरकारी एजेंसी को देना चाहिए।”

जलवायु परिवर्तन की वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली गिरने और इसके परिणामस्वरूप होने वाली मौतों में वर्तमान वृद्धि को जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लेशियरों के पिघलने से हवा में नमी बढ़ रही है और ग्लोबल वार्मिंग से गर्मी बढ़ रही है जिससे बिजली गिरने के दो मुख्य कारणों में योगदान बढ़ रहा है।

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ रहा है तापमान
श्रीवास्तव ने बताया, “ग्लोबल वार्मिंग से तापमान दिनो ब दिन बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह से वातावरण में नमी भी बढ़ रही है। क्योंकि हिमालय पिघल रहा है जब समुद्र में पानी गर्म होता है तो यह ज्यादा भाप पैदा करेगा। प्रकाश के लिए आवश्यक दो मुख्य घटक बढ़ रहे हैं गर्म पृथ्वी और जल वाष्प यही वजह है कि बिजली गिरने की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।”

बिजली गिरने से 96 फीसदी से ज्यादा मौतें ग्रामीण इलाकों से
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक बिजली गिरने से होने वाली मौतों में 96 फीसदी से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में हैं। श्रीवास्तव ने आगे कहा, “हमने गांवों की भौगोलिक विशेषताओं का रिस्की मूल्यांकन किया जैसे कि ऊंचाई वाले क्षेत्र चाहे वह पेड़ हों या पहाड़ों की चोटी या बिजली के खंभे हों। इसके अलावा, बिजली लंबवत रूप से जमीन से टकराती है और गोलाकार तरीके से चारों ओर फैल जाती है। यह इमारतों के कारण शहरी क्षेत्रों में नहीं फैल सकता है लेकिन गांवों में क्षेत्र साफ है इसलिए यह खेतों पर पड़ता है और पूरे क्षेत्र में फैलता है।”

चिंता का कारण
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार प्राकृतिक वजहों से होने वाली आकस्मिक मौतों में बिजली गिरने से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है।
साल 2020 में, बिजली गिरने से 2,862 लोगों की मौत हुई, जो अन्य ज्ञात कारणों जैसे चक्रवात (37), हीट स्ट्रोक (530) और बाढ़ (959) की तुलना में काफी अधिक है। बिहार (168%), पंजाब (331%) और हरियाणा (164%) जैसे राज्यों में बिजली गिरने की घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है। यह चिंता का कारण है क्योंकि इन कृषि राज्यों में अधिक लोग हैं जो कृषि गतिविधियों से जुड़े हैं और खुले क्षेत्रों में अधिक समय बिताते हैं।

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