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डिजिटल गेम के बाजार में बेहतर भविष्य

सरकार डिजिडल गेमिंग उद्योग की क्षमता से पूरी तरह से परिचित है।

डिजिटल गेम के बाजार में बेहतर भविष्य

भारत में डिजिटल गेमिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। इस बाजार के उपयोक्ताओं की संख्या दस करोड़ के पार पहुंच चुकी है। डिजिटल गेमिंग उद्योग की इस रफ्तार ने उपयोक्ताओं के साथ नए गेम बनाने वाले युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस उद्योग में तेजी से नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। भारत का घरेलू आनलाइन गेमिंग उद्योग 2016 में अनुमानित 29 करोड़ डालर का था। एक अनुमान के मुताबिक यह उद्योग 2024 तक 370 करोड़ डालर होने का अनुमान है। कोरोना महामारी के कारण उपयोक्ताओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।

भारत की नई शिक्षा नीति में औपचारिक शिक्षा को और अधिक सुलभ व रोचक बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों पर जोर दिया गया है। इसका अर्थ है कि गेमिंग मंच आनलाइन शिक्षण, कोचिंग और प्रवेश परीक्षा की तैयारी जैसे क्षेत्रों में भी दिखेंगे। सरकार डिजिडल गेमिंग उद्योग की क्षमता से पूरी तरह से परिचित है।

यदि आपको मोबाइल फोन या लैपटाप पर वीडियो गेम खेलना पसंद है? या आप खुद कोई वीडियो गेम तैयार करने की इच्छा रखते हैं? यदि इन सवालों के जवाब आपकी ओर से हां हैं तो निश्चत रूप से गेमिंग उद्योग आप जैसे प्रतिभावान युवाओं की राह देख रहा है। यह ऐसा उद्योग है जिसको ऊपरी तौर पर समझना थोड़ा मुश्किल है। इसको समझने के लिए गणित, भौतिक और कंप्यूटर स्क्रिप्टिंग का ज्ञान होना जरूरी है।

इन योग्यताओं के होने पर आप इस उद्योग में गेमिंग आर्टिस्ट, गेम डेवलपर, गेम टेस्टर, गेमडी-कोडर, पोर्टिंग आदि का काम कर सकते हैं। वीडियो गेमिंग के क्षेत्र में करिअर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए वर्तमान में अनेक विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें से किसी को अपनी रुचि के मुताबिक बतौर करिअर चुना जा सकता है।

कुछ प्रमुख गेमिंग विकल्प

वीडियो गेमिंग : इसमें टीवी या टीवी जैसे उपकरण पर खेले जाने वाले इलेक्ट्रानिक या कंप्यूटर गेम आते हैं।
कंसोल गेमिंग : इसमें प्ले स्टेशन जैसे गेम कंसोल पर गेम खेले जाते हैं। इसमें कंट्रोलर को इनपुट उपकरण व कंप्यूटर मानिटर को आउटपुट उपकरण के तौर पर उपयोग किया जाता है।
वायरलेस गेमिंग : वायरलेस गेमिंग में ऐसे गेम आते हैं, जो हाथों में पकड़े जाने वाले डिवाइस जैसे- पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट्स (पीडीए), टैबलेट और मोबाइल फोन में खेले जातेहैं।
पीसी गेमिंग : पर्सनल कंप्यूटर में खेले जाने वाले वीडियो गेम्स को पीसी गेमिंग कहते हैं। ऐसे गेम्स को सीडी या डीवीडी में भी स्टोर करके रखा जा सकता है और आनलाइन भी खेला जा सकता है।
मल्टीप्लेयर गेमिंग : मल्टीप्लेयर गेमिंग में किसी गेम को खेलने वाले अन्य खिलाड़ियों के साथ आपको खेलना होता है। इन खेलों को पूरे विश्व में एक साथ खेला जा सकता है व दूसरों से मुकाबला भी किया जा सकता है।
योग्यता
किसी भी स्ट्रीम से 50 फीसद अंकों के साथ बारहवीं पास विद्यार्थी डिजिटल गेमिंग के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। इसके बाद स्नातकोत्तर स्तर पर भी इसके पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। कंप्यूटर साइंस और गणित जैसे विषय मजबूत हैं तो इस क्षेत्र के पाठ्यक्रम आपके लिए आसान हो सकते हैं। कलर कंपोजिशन, डिजाइन, विजुअलाइजेशन और फिनिशिंग कौशल में प्रशिक्षण करने से इस पेशे में आगे बढ़ने में बहुत मदद मिलती है। कोडर के लिए सी++ की प्रोग्रामिंग, एएसपी, जावा और डब्लूपीए का ज्ञान जरूरी है।

  • पाठ्यक्रम

बीए (एनीमेशन एंड कंप्यूटर ग्राफिक्स)
बीए (डिजिटल फिल्म मेकिंग एंड एनीमेशन)
बीटेक (कंप्यूटर साइंस एंड गेम डेवलपमेंट)
बीएससी (गेमिंग ग्राफिक्स और डिजाइन)
बैचलर इन एनीमेशन एंड डिजाइन
इंटीग्रेटेड एमएससी (मल्टीमीडिया एंड एनीमेशन विद गेम आर्ट एंड डिजाइन)
एमएससी (गेमिंग)
एमएससी (गेमिंग डिजाइन एंड डेवलपमेंट)
एमएससी (मल्टीमीडिया एंड गेमिंग एनीमेशन)

  • आशीष झा (करिअर परामर्शदाता)

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