ताज़ा खबर
 

छठ पूजा के लिए सरकार बनाएगी 97नए घाट

चुनाव करीब नहीं होने के बावजूद पूर्वांचल के प्रवासियों (बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों) के लोक पर्व छठ पर राजनीति शुरू हो गई है..

चुनाव करीब नहीं होने के बावजूद पूर्वांचल के प्रवासियों (बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों) के लोक पर्व छठ पर राजनीति शुरू हो गई है। इन्हीं मतदाताओं के बूते दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार इस बार सरकारी खर्चे से 97 नए घाटों का रखरखाव करेगी।
अब तक सरकारी घाटों की संख्या 72 थी, जो इस फैसले के बाद बढ़ कर अब 169 हो जाएगी। हर घाटों पर बिजली-पानी आदि सुविधाओं के लिए सरकार 70-70 हजार रुपए खर्च करेगी। दिल्ली भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दूबे ने इसके लिए आप सरकार को धन्यवाद दिया है।

छठ के बहाने सालों से दिल्ली में राजनीति होती रहती है। दिल्ली में प्रवासियों की तादात इस कदर हो गई है कि उनके समर्थन के बिना कोई दल चुनाव जीत ही नहीं सकता। इस बार छठ का मुख्य पर्व 17 और 18 नवंबर को है लेकिन दिवाली के साथ ही पर्व की तैयारी शुरू हो जाएगी। बिना किसी पुरोहित और मंत्र आदि के बिना पूरी पवित्रता से मनाया जाने वाला यह पर्व पूर्वांचल की पहचान से जुड़ गया है।

पहले यह वर्ग कांग्रेस के साथ था तो कांग्रेस लगातार तीन बार दिल्ली में सरकार बना पाई। अब आप के साथ हो गया तो उसकी सरकार बन गई। इस वर्ग के छिटकने के डर से ही आप नेता अरविंद केजरीवाल बिहार विधानसभा चुनाव में जद (एकी) नेता नीतीश कुमार का समर्थन करते रहे। लेकिन कहा जा रहा है कि उसे कांग्रेस और राजद का भी समर्थन मान लेने पर दिल्ली के प्रवासियों के नाराज होने के खतरे के चलते वे चुनाव प्रचार करने नहीं गए। माना यह जाता है कि दिल्ली में रहने वाले ज्यादातर प्रवासियों का परिवार बिहार में राजद को वोट नहीं करता है। वैसे चुनाव नतीजों ने तो इस तरह की धारणा को तोड़ दिया है। दिल्ली के पूर्वांचल के लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए दिल्ली की पहली भाजपा सरकार ने सरकारी खर्चे पर छठ घाटों की व्यवस्था करवाई थी।

1998 में कांग्रेस सरकार बनने पर बिहार के बाहर पहली बार 2000 में तब की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने छठ पर ऐच्छिक अवकाश की घोषणा की थी। तब से लगातार ऐच्छिक अवकाश को सार्वजनिक अवकाश करने की मांग होती रही। पिछले साल राष्ट्रपति शासन में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई। केंद्र सरकार ने 2011 में देश भर में छठ पर एच्छिक अवकाश घोषित किया।
कांग्रेस सरकार ने पूर्वांचल के लोगों को अपना स्थायी समर्थक बनाने के मकसद से दिल्ली में भोजपुरी मैथिली अकादमी बनाई। कांग्रेस ने पहली बार बिहार मूल के महाबल मिश्र को पहली बार 2009 में पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया। 2013 और 2015 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से ज्यादाआप ने पूर्वांचल के लोगों को टिकट दिए। 2013 के चुनाव में भी प्रवासियों ने आप का ज्यादा समर्थन किया लेकिन फरवरी 2015 के चुनाव में तो उनका एकतरफा वोट आप को मिला। माना जाता है कि उसी बूते आप को 54 फीसद वोट और 67 सीटें मिली। दिल्ली सरकार में भी पहली बार पूर्वांचल मूल के दो लोगों को एक साथ मंत्री बनाया गया। अब छठ के लिए घाटों की संख्या 72 से बढ़ाकर 169 करके आप ने पूर्वांचल के वोटरों में अपनी पैठ को और मजबूत बनाने की कोशिश की है।

पहले सरकारी छट घाट यमुना और बड़े इलाकों में ही होते थे। अब इसे दिल्ली भर में किया गया है। अजीत दूबे कहते हैं कि इसके चलते अब लोगों को खुद पैसे जुटाकर घाटों को ठीक करने का काम कम करना पड़ेगा। मजदूर नेता बलराम सिंह ने इसी तरह एनसीआर के अन्य इलाकों में हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार से सरकारी खर्चे पर छट घाट बनवाने की अपील की है। उन्होंने दिल्ली सरकार से यह आग्रह किया है कि वह घाटों की साफ-सफाई पहले शुरू करवाए और यमुना और हिंडन में पानी जल्द छुड़वाए।

 

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 छठ पूजा के लिए आपको क्यों चाहिए मशहूर हस्तियां?
2 लालू की किंगमेकर जैसी दमदार वापसी के पीछे कुछ तो वजह है…
3 OROP: मांगे पूरी नहीं होने पर आज से पूर्व सैनिक लौटाएंगे अपने पदक
यह पढ़ा क्या?
X