ताज़ा खबर
 

बिहार के बाद अब यूपी के गाजीपुर में गंगा किनारे दिखे अनगिनत शव, दिल्ली में एक माह में उठे 94 सौ जनाजे

सोमवार की शाम गाजीपुर पुलिस ने बिहार के भभुआ से लाशों को गाजीपुर में गंगा में बहाने ला रहे दर्जन भर लोगों को पकड़ा है।

कोविड से हुई मौत के बाद अपने स्वजन का अंतिम संस्कार करता परिवार का सदस्य। (फोटो- पीटीआई)

एक तरफ कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों का इलाज नहीं मिलने से लगातार मौतों का सिलसिला जारी है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार और उनके अधिकारी गंगा नदी में बह रहे लाशों को लेकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने में जुटे हैं। अभी हाल ही में बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी में मिलीं 71 से ज्यादा लाशों पर स्थानीय प्रशासन ने कहा कि ये लाश पड़ोसी राज्य यूपी से बहकर यहां आई हैं।

इसके ठीक उलट बक्सर से लगा पड़ोसी जिला यूपी के गाजीपुर के जिला प्रशासन ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि गंगा में लाश बहाए जाने की परंपरा पूरे देश में हैं। इसलिए यह कहना कि ये गाजीपुर से बहाई गई है, गलत है। हालांकि इसकी जांच के लिए रिवर पैट्रोलिंग शुरू कर दी गई है। बक्सर जिला प्रशासन ने गंगा में मिली 71 लाशों का डीएनए टेस्ट और कोविड-19 टेस्ट के लिए नमूने लिए हैं। बाद में उनका गंगा के किनारे ही दफन कर दिया गया। बिहार के बक्सर के अलावा यूपी के गाजीपुर में भी गंगा किनारे अनगिनत लाशें मिली हैं।

कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों ने उन्हें बिना अंतिम संस्कार किए घाटों पर रखकर चले गए हैं। इस बीच सोमवार की शाम गाजीपुर पुलिस ने बिहार के भभुआ से लाशों को गाजीपुर में गंगा में बहाने ला रहे दर्जन भर लोगों को पकड़ा है।

इस बीच कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप राजधानी दिल्ली पर ज्यादा दिख रहा है। राजधानी में नगर निगम द्वारा संचालित 28 कोविड नामित शवदाह केंद्रों में पिछले अप्रैल महीने में 9,400 से ज्यादा लोगों की कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। महामारी की शुरुआत होने के बाद राजधानी में अंतिम संस्कार का यह सर्वाधिक आंकड़ा है।

पिछले एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के तहत कोविड नामित नौ शवदाह केंद्रों में 3,931 लाशों का अंतिम संस्कार हुआ और लाशें दफनाई गई। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 14 केंद्रों पर इस दौरान 3,978 शव जलाए गए। पूर्वी नगर निगम के कोविड शवदाह केंद्रों पर 1,523 लोगों का शवदाह हुआ। इस तरह से अप्रैल महीने में इन तीन नगर निगमों में कुल 9,423 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ।

उधर, गुजरात के सूरत शहर में पिछले तीन महीनों 3 हजार से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार गैस चैंबर के माध्यम से हुआ, लेकिन परिजन उनकी अस्थियां नहीं ले जाते हैं। इससे वहां अस्थियों का ढेर लग गया और अंतिम संस्कार करने वाले कर्मचारी पूरे दिन इन अस्थियों को नाले में बहाते रहते हैं। उनका कहना है कि 95% कोरोना मृतकों के परिजन अस्थियां नहीं ले जा रहे हैं। ऐसे में इन्हें नाले में बहाना हमारी मजबूरी है। आगे जाकर नाले का पानी ताप्ती नदी में मिल जाती है। परिजनों का कहना है कि गैस चैंबर में सैकड़ों लोगों का अंतिम संस्कार होता है। इसलिए यह पता करना मुश्किल है कि कौन सी अस्थि किसकी है।

Next Stories
1 उत्तराखंडः 3 प्लांट होने के बावजूद सूबे में ऑक्सिजन का टोटा, केंद्र पर बरसा HC, उधर, एमपी में HC ने कैदियों को टेंपरेरी बेल देने को कहा
2 ब्लैक फंगस पर बोले चिकित्सक- ये नाक के जरिये करता है हमला, नाक की सफाई रखने से ही बचाव मुमकिन
3 Aarogya Setu को भी COVID-19 हो गया क्या, TV पर नहीं दिखता?- पूछने लगे आचार्य; बुरी तरह ट्रोल
ये पढ़ा क्या?
X