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ऑनलाइन पंजीकृत नहीं 92 फीसद मजदूर, नहीं मिल रही 5000 की मदद

दिल्ली सरकार के श्रमिक कल्याण वोर्ड के पूर्व सदस्य व दिल्ली असंगठित निर्माण मजदूर यूनियन के महासचिव अमजद हसन ने कहा-निश्चित तौर पर दिल्ली सरकार का यह कहना कि सभी निर्माण मजदूरों को 5000 रुपए दे दिए गए, गलत है। मजदूरों की कुल संख्या की तुलना में आॅनलाइन पंजीकृत मजदूर तो नाममात्र के हैं।

सरकारी सहायता के लिए परेशान हैं मजदूर।

पूर्णबंदी में पैदल मार्च करने वाले दिल्ली के लाखों निर्माण मजदूर फिर आहत हैं। सभी मजदूरों को 5000 रुपए देने की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावों के उलट दिल्ली के 92 फीसद मजदूर ऐसे हैं जिन्हें दिल्ली सरकार की यह सहायता नहीं मिलेगी, क्योंकि वे यहां आॅनलाइन पंजीकृत नहीं हैं। दिल्ली में आॅनलाइन पंजीकरण होने वाले मजदूरों की संख्या मौजूद कुल मजदूरों के आठ फीसद से भी कम है। तकनीकी में मात खाए इन मजदूरों की दलील है कि जब मजदूरी कराते समय हम दिहाड़ियों की आॅनलाइन पंजीकरण की पहचान नहीं खोजी जाती तो राहत के भुगतान के समय ऐसी बंदिशें क्यों? दरअसल, तमाम मजदूर संगठनों का दावा है कि दिल्ली में निर्माण मजदूरों की संख्या साढ़े दस लाख से ऊपर है। इनमें महिलाएं भी हैं। इनमें से साढ़े पांच लाख मजदूर ऐसे हैं जो विभिन्न युनियनों या संगठनों और सरकारी विभागों के साथ पंजीकृत हो चुके हैं। मतलब उनके पास किसी न किसी यूनियन या संगठन का पहचान पत्र है और जो कहीं न कहीं श्रमरत है।

सरकार के कंप्यूटर में दर्ज केवल 40 हजार मजदूरों को ही मिलेगी सहायत
बता दें कि 2018 के बाद दिल्ली सरकार ने मजदूरों को आॅनलाइन पंजीकृत करने का फैसला किया था। इससे पहले उन मजदूरों को सारे लाभ उनके पंजीयन पर ही मिलते थे। आॅनलाइन पंजीकरण प्रणाली सरल होने के बजाय जटिल हो गई। मसलन जो फार्म चार पेज का होता था वह 12 पेज तक का कर दिया गया। कंप्यूटर, नेट, ईमेल,डाटा, बैंक खाता, दस्तावेजों को अपलोड करने आदि जरूरी चीजों को जुटाने की जहमत उठाने वाले मजदूरों में 8 अप्रैल 2020 तक केवल 39600 ही आॅनलाइन पंजीकृत हो पाए। मजदूरों के लिए काम करने वाले संगठनों का दावा है कि प्रदेश के विधानसभा चुनाव के अलावा विभागों में खाली पड़े पद, वेबसाइट का काम न करना, दिल्ली में दंगे का हो जाना और अब कोरोना-पूर्णबंदी आदि के चलते पंजीकरण प्रभावित रहा। आवेदन के दो-दे हफ्ते के बाद भी मजदूरों को मजदूरों को आॅनलाइन पंजीकरण नंबर नहीं मिल पाए।

केवल आठ फीसद मजदूर ही आॅनलाइन पंजीकृत
दिल्ली सरकार के श्रमिक कल्याण वोर्ड के पूर्व सदस्य व दिल्ली असंगठित निर्माण मजदूर यूनियन के महासचिव अमजद हसन ने कहा-निश्चित तौर पर दिल्ली सरकार का यह कहना कि सभी निर्माण मजदूरों को 5000 रुपए दे दिए गए, गलत है। मजदूरों की कुल संख्या की तुलना में आॅनलाइन पंजीकृत मजदूर तो नाममात्र के हैं। दो साल पहले तक (2018 तक) के आंकड़े बताते हैं कि असंगठित पंजीकृत मजदूरों की संख्या साढेÞ पांच लाख है। दो लाख 80 हजार मजदूरों ने तो अपना अंशदान देकर अपना नवीकरण कराया है। उनका दावा है कि इनकी संख्या 10 लाख से ज्यादा है।

उन्होंने बताया कि मजदूरों का अपना पैसा प्रदेश सरकार के पास 3200 करोड़ पड़ा है। जो सेस और अन्य अंशदान से जुटाया गया है। निर्माण मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिए एक स्वतंत्र बोर्ड है। जिसे और संवेदनशील करने की जरूरत है। दिल्ली में यह व्यवस्था है कि 10 लाख से ऊपर का कोई निर्माण कार्य होगा तो खर्च करने वाला एक फीसद (सेस) सरकार को देगा जो मजदूरों के कल्याण के लिए सरकार खर्च करेगी। श्रममंत्री गोपाल राय बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, उन्हें बताना चाहिए कि बाकि मजदूरों के भुगतान कब और कैसे होगा?

निर्माण मजदूर अधिकार अभियान के समन्वयक थानेश्वर दयाल आदिगौड़ ने कहा-यह समस्या जटिल बना दी गई है। उन्होंने श्रम विभाग को दोषी ठहराते हुए कहा-अदालतों के आदेश के बावजूद बीते चार सालों से बोर्ड में स्थायी सचिव की नियुक्ति नहीं की गई। बोर्ड के बैठक या सलाहकार समिति की बैठक बीते एक साल में हुई ही नहीं।

आॅनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को सुगम एवं सरल बनाने की मांग, कर्मचारियों को पक्की भर्ती की मांग आदि पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता, जिसका सीधा असर आज श्रमिकों पर पड़ा है। कोरोना कोप के दौरान लाखों मजदूर सरकार के 5000 वाले राहत कवच से बाहर हो गए। अखिल भारतीय राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम मजदूर संघ के महासचिव बलिराम सिंह ने कहा-सरकार के मीडिया में दिए बयान और धरातल में किए काम में भारी अंतर है। वाजिब जरूरतमंतों में से 90 फीसद दिहाड़ी कामगारों व मजदूरों को कोई धन नहीं मिला।

9149 मजदूरों के पंजीकरण की प्रक्रिया की तेज
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावों के मुताबिक दिल्ली सरकार ने 32358 मजदूरों के खातों में 16.18 करोड़ रुपए हस्तांतरित कर दिए हैं। अभी कई मजदूरों का आॅनलाइन पंजीकरण नहीं हुआ है। 9149 मजदूरों के पंजीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जल्द ही इनके खातों में भी पैसे पहुंचेंगे। करीब 4.5 करोड़ रुपए का भुगतान होगा।

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