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पुराने बिल की वजह से 92% किसानों की दुर्गति, डिबेट में बोले भारतीय कृषि समाज के अध्यक्ष कृष्ण बीर चौधरी

टीवी चैनल रिपब्लिक भारत के कार्यक्रम 'पूछता है भारत' में एंकर अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत में उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता पवन खटाना से पूछा कि "अगर पुराना किसान बिल सही है तो आज तक हमारे किसान इतने गरीब क्यों है?"

farmer protestमीडिया से बात करते आंदोलनकारी किसान।

नए कृषि कानूनों में संशोधन के सरकार के प्रस्ताव को बुधवार को खारिज करने के बाद अब किसान नेताओं ने आंदोलन और तेज करने का निर्णय लिया है। कहा है कि शनिवार को वे जयपुर-दिल्ली और दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे को बंद करेंगे तथा 14 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कर आंदोलन को तेज करेंगे। इस बीच भारतीय कृषि समाज के अध्यक्ष कृष्ण बीर चौधरी ने कहा, “92 फीसदी किसानों की आजतक जो दुर्गति हुई है वह पुराने किसान बिल की वजह से हुई है।” टीवी चैनल रिपब्लिक भारत के कार्यक्रम ‘पूछता है भारत’ में एंकर अर्नब गोस्वामी के साथ बातचीत में उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता पवन खटाना से पूछा कि “अगर पुराना किसान बिल सही है तो आज तक हमारे किसान इतने गरीब क्यों है?”

चैनल के ट्विटर हैंडल पर कई यूजरों ने किसान आंदोलन का विरोध किया और कहा कि यह सिर्फ विवाद खड़े करने का बहाना है। काजोल चतुर्वेदी @kajolchaturvdi नाम के एक यूजर ने टीवी चैनल रिपब्लिक भारत के ट्विटर हैंडल पर लिखा, “इनको अगर सच में बात करनी होती तो छह-छह महीने का राशन साथ नहीं लाते…जबर्दस्ती की ब्लैकमेलिंग चल रही है अब.. खुद छह महीने का राशन ले आए हैं बाकियों को कमाने खाने देना नहीं है… और इंडिया की हर जगह बेइज्जती करवाने है बस… यही एजेंडा है।”

अनिल वर्मा @anilrecker नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा, “पिछले साल 14 दिसम्बर से CAA विरोध के नाम पर जामिया इस्लामिया के सामने बसें जलाना, दंगे हिंसा करना शुरू हुआ था, CAA विरोध के नाम पर देश भर में पुलिस थाने, रेलवे स्टेशन जलाए गए थे, सड़के ब्लॉक की गई।दंगे किये गए। दुबारा पैटर्न एकदम वहीं है, बस बहाना नया है।”

इस बीच एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि सरकार के प्रस्ताव में कुछ भी नया नहीं है और ‘संयुक्त किसान समिति’ ने बुधवार को अपनी बैठक में इसे “पूरी तरह खारिज” कर दिया। किसान संघ के नेताओं ने प्रस्ताव को देश के किसानों का “अपमान” करार दिया। उन्होंने हालांकि कहा कि सरकार अगर वार्ता के लिये नया प्रस्ताव भेजती है तो वे उस पर विचार कर सकते हैं।

सरकार और किसान संघ के नेताओं के बीच आज होने वाली छठे दौर की बातचीत को रद्द कर दिया गया था। संघ के नेताओं के मुताबिक उत्तर भारत के सभी किसानों के लिये 14 दिसंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया गया है जबकि दक्षिण में रहने वाले किसानों से जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के लिये कहा गया है। उन्होंने कहा कि देश के सभी टोल प्लाजा को 12 दिसंबर को ‘टोल-फ्री’ (कर मुक्त) किया जाएगा।

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