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7वां वेतन आयोग: स‍िफार‍िशें लागू करने की प्रक्रिया जारी, कर्मचारियों को जून के बाद नए भत्ते का तोहफा दे सकती है नरेंद्र मोदी सरकार

ईसीओएस 1 जून से पहले इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार के समक्ष रखेगी, जिससे कि 1 जून से पहले ही केंद्र द्वारा इस रिपोर्ट को अच्छे से समझा जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (File Photo)

केंद्र सरकार द्वारा बहुत ही जल्द सातवां वेतन आयोग लागू किया जा सकता है। इसके लागू होने के बाद यह सरकारी अधिकारियों को नए भत्ते के रूप में यह नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से तोहफा होगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार अशोक लवासा समिति द्वारा नए भत्ते के लिए दिए गए सुझावों के आधार पर एम्पावर्ड कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज (ईसीओएस) ने ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों को कहना है कि ईसीओएस 1 जून से पहले इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार के समक्ष रखेगी, जिससे कि 1 जून से पहले ही केंद्र द्वारा इस रिपोर्ट को अच्छे से समझा जा सके। इस रिपोर्ट पर सरकार से सहमति मिलने के बाद जून के बाद कर्मचारियों को नया भत्ता मिलना शुरु हो जाएगा। इस संशोधित भत्ते को 1 अप्रैल से लागू किया जाएगा।

इससे पहले सरकार सेना के तीनों अंगों (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) में कार्यरत कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के मुताबिक वेतनमान देने का फैसला कर चुकी है। नया वेतनमान 1 जनवरी 2016 से लागू होगा। बता दें कि जब केन्द्र सरकार ने जून 2016 में सभी सिविलियन कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के मुताबिक 1 जनवरी 2016 से नए वेतनमान लागू करने का फैसला किया था तब सेना के तीनों प्रमुखों ने वेतन आयोग की सिफारिशों पर सैन्य संगठनों द्वारा उठाई गई विसंगतियों को दूर करने तक इसे स्थगित रखने का अनुरोध सरकार से किया था। सैन्य संगठनों ने नॉन फंक्शनल अपग्रेड, मिलिट्री सर्विस पे, कॉमन पे मैट्रिक्स और विकलांगता भत्ता से संबंधित सिफारिशों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद तीनों सेना प्रमुखों ने इसके समाधान होने तक नया वेतनमान नहीं लागू करने का अनुरोध सरकार से किया था।

सैनिकों की बड़ी मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने छठे वेतन आयोग के तहत लागू विकलांगता पेंशन की पुरानी व्यवस्था को बनाए रखा है। छठे वेतन आयोग के तहत सैनिकों को विकलांगता के प्रतिशत के आधार पर पेंशन दिया जाता था जबकि सातवें वेतन आयोग (7वें पे-कमीशन) ने अपनी सिफारिश में इस व्यवस्था की जगह स्लैब आधारित व्यवस्था लागू करने को कहा था। इससे पहले तीनों सेना प्रमुखों ने सरकार के सामने ये बात उठाई थी कि सेना को विकलांगता भत्ता और पेंशन प्रतिशत के आधार पर ही दिया जाय। इससे सरकारी खजाने पर करीब 130 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष को बोझ आएगा।

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