होर्मुज जलमार्ग के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले सात जहाज फंसे हुए हैं जिनमें 148 भारतीय नाविक सवार हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव बढ़ने से पहले होर्मुज जलमार्ग के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले सात जहाज मौजूद थे।
एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के शुरुआती चरण की तरह मौजूदा हालात में भी इन जहाजों के तनाव कम होने से पहले फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की संभावना नहीं है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भारतीय ध्वज वाले पांच जहाज इस क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियों में लगे हुए हैं। अधिकारी ने कहा, ”फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले सात जहाजों पर लगभग 148 नाविक सवार हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिलहाल उनकी इस क्षेत्र से बाहर आने की कोई योजना नहीं है।”
ईरानी हमले में भारतीय चालक दल का एक सदस्य लापता
अधिकारी ने बताया कि 14 जुलाई की तड़के व्यापारिक जहाज एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा बी पर हुए हमले ऐसे समय हुए जब दो दिन पहले साइप्रस के ध्वज वाले कंटेनर जहाज जीएफएस गैलेक्सी पर ईरानी हमले में भारतीय चालक दल का एक सदस्य लापता हो गया था। उन्होंने बताया कि एमटी अल बहियाह पर चालक दल के कुल 23 सदस्य सवार थे जिनमें 12 भारतीय, छह फिलीपीन के, तीन रूसी, एक मिस्र का और एक श्रीलंका का नागरिक शामिल था।
वहीं ‘एमटी मोम्बासा बी’ पर भी चालक दल के 23 सदस्य थे जिनमें 17 भारतीय, यूक्रेन के तीन और तीन जॉर्जिया के नागरिक शामिल थे। अधिकारी ने कहा कि ‘एमटी अल बहियाह’ पर सवार चालक दल के एक भारतीय सदस्य की मौत की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि इससे जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
होर्मुज में भारतीय नाविकों पर हमले के बाद भारत सख्त
वहीं, भारत ने होर्मुज में भारतीय नाविकों पर हुए हमले को लेकर ईरान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस मामले में विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान के मिशन उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को तलब किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में क्रूज मिसाइलों के जरिये ईरान ने यूएई के दो तेल टैंकरों पर हमला किया। हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और आठ अन्य लोग घायल हो गए। दो तेल टैंकरों- मोम्बासा और अल बहियाह पर उस समय हमला हुआ जब वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे थे। ये हमले ओमान की समुद्री सीमा के भीतर हुए। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
(इनपुट- भाषा)
