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बंगाल में एक साल में हिंसा के 693 मामले, नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो की लिस्ट में राजनीतिक हत्याओं में टॉप पर

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जाने के पीछे उस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है जो कि चुनाव आयोग को सौंपी गई थी।

bengal, electionsचुनाव में सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षा बलों को बंगाल में तैनात किया गया है। (PTI)।

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जाने के पीछे उस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, जो कि चुनाव आयोग को सौंपी गई थी। दरअसल, चुनाव आयोग को बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं से जुड़ी एक रिपोर्ट सौंपी गई थी। जिसके चलते ही आयोग ने विधानसभा चुनाव आठ चरणों में कराए जाने का फैसला लिया। सूत्रों ने ये जानकारी दी।

चुनाव आयोग को सौंपी गई गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा की 693 घटनाएं हुईं और 11 मौतें हुईं। चुनावों के बाद भी 1 जून से 31 दिसंबर के बीच राजनीतिक हिंसा के 852 मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में, 61 लोगों की मौत हुई। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल में 42 में से 18 सीटें जीतीं थीं। मंत्रालय के मुताबिक 2020 में, 663 घटनाएं दर्ज की गईं, जिसमें 57 लोग मारे गए। साथ ही, 1-7 जनवरी के बीच, हिंसा की 23 घटनाएं हुईं, जिसमें भाजपा और टीएमसी के एक-एक कार्यकर्ता मारे गए और 43 घायल हुए। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 पंचायत चुनावों के दौरान, अलग-अलग दलों से जुड़े 23 राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौत हुई।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में 27 मार्च, 1 अप्रैल, 6 अप्रैल, 10 अप्रैल, 17 अप्रैल, 22 अप्रैल, 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को आठ चरणों में मतदान होगा। 2 मई को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने पहले ही राज्य में सीएपीएफ की 125 कंपनियों को भेजा हुआ है।

वहीं, भाजपा ने चुनाव आयोग की घोषणा का स्वागत किया है और दावा किया है कि बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष विधानसभा चुनाव कराने के लिए ऐसा कदम उठाया गया क्योंकि राज्य में हिंसक चुनावों का इतिहास रहा है।

राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों में राजनीतिक हिंसा का भी जिक्र देखने को मिला है।

2019 में जारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, राजनीतिक हत्याओं में बंगाल देश में सबसे ऊपर है। भाजपा ने दावा किया है कि 2014 के बाद से उसके 100 से अधिक कार्यकर्ता मारे गए हैं।

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