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मुसलमान के नाम पर 66% हिंसा बीजेपी शासित राज्यों में, झारखंड का रिकॉर्ड खराब

पिछले एक दशक में पूरे भारत में 297 घृणित अपराध हुए हैं, जिसमें 98 लोग मारे गए और 722 लोग घायल हुए। हालांकि Factchecker.in के डेटा के मुताबिक पिछले कुछ सालों में भीड़ की हिंसा में खासी बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं।

कुछ स्थानीय लोगों ने तबरेज की पिटाई की और बाद में उसे पुलिस को सौंप दिया। (फेसबुक फोटो)

झारखंड में भीड़ द्वारा मुस्लिम युवक की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का यह इस साल का पहला मामला नहीं है। Factchecker.in वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल हेट क्राइम का यह 11वां उदाहरण था। भीड़ की हिंसा में अब तक चार लोग मारे जा चुके हैं जबकि 22 लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में पूरे भारत में 297 घृणित अपराध हुए हैं, जिसमें 98 लोग मारे गए और 722 लोग घायल हुए। हालांकि Factchecker.in के डेटा के मुताबिक पिछले कुछ सालों में भीड़ की हिंसा में खासी बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। साल 2015 से पशु चोरी और हत्या को लेकर 121 मॉब लिचिंग की घटनाएं हुईं। इस मामले में साल 2012 से 2014 के बीच के आकंड़े को देखें तो ऐसा घटनाएं सिर्फ 6 बार घटीं।

वहीं 2009 से 2019 के बीच जुटाए गए डेटा से संकेत मिले हैं कि इन घटनाओं में 59 फीसदी पीड़ित मुस्लिम समुदाय के लोग थे। इसमें 28 फीसदी मामले कथित तौर पर पशु चोरी और हत्या से जुड़े से पाए गए। आकंड़ों के मुताबिक 66 फीसदी घटनाएं भाजपा शासित राज्यों में घटीं जबकि 16 फीसदी लोग कांग्रेस शासित राज्यों में मोब लिचिंग का शिकार बने।

गौरतलब है कि 18 जून को झारखंड के खरसावां जिले में एक मुस्लिम युवक तबरेज अंसारी चोरी के शक में भीड़ की हिंसा का शिकार हो गया। पुलिस को सौंपने से पहले उसे एक पोल से बांध दिया गया और घंटों तक बेरहमी से पीटा गया। 22 जून को उसकी मौत हो गई। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इसमें तबरेज से एक शख्स जबरन ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ का नारा लगाने के लिए कह रहा है। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है।

दूसरी तरफ मृतक के परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि पुलिस और डॉक्टरों को भी इंसाफ के कटघरे में लाया जाना चाहिए। परिवार ने आरोप लगाया कि खूब मदद की गुहार लगाने के बाद भी पुलिस ने घायल तबरेज के इलाज का इंतजाम नहीं किया। हॉस्पिटल ले जाने से काफी देर पहले तक उसकी मौत हो चुकी थी।

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