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गंगा स्वच्छता का हाल: गंगा में गंदगी घोल रहे कस्बों के नाले, यूपी है नंबर 2

पड़ताल में सामने आए आकड़ों के मुताबिक, कुल मिलाकर 97 में से 66 कस्बों का कम से कम एक नाला गंगा में गिरता है। इनमें से 31 पश्चिम बंगाल के हैं। पश्चिम बंगाल के बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है।

Author Updated: January 10, 2019 1:49 PM
गंगा की सबसे बुरी हालत पश्चिम बंगाल में है। (फोटो सोर्स : Indian Express)

स्वच्छ भारत और गंगा सफाई का अभियान छेड़ने के बाद भी आंकड़ों में हालात बदतर बने हुए हैं। गंगा सफाई को लेकर किए गए दावे धरातल पर खोखले ही नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि 97 में से 66 कस्बों का कम से कम एक नाला नदी में खुलता है। मोदी सरकार में बाकायदा मंत्रालय बनाए जाने के बाद भी गंगा पावन नहीं हो पा रही है। गंगा की सबसे बुरी हालत पश्चिम बंगाल में है। इसमें दूसरे नंबर आश्चर्यजनक रूप से भाजपाई राज्य उत्तर प्रदेश है।

पश्चिम बंगाल में गंगा से सटे करीब 78 फीसदी कस्बों के नाले सीधे नदी में गिरते हैं। पांच राज्यों के किनारे बसे सभी 97 कस्बों में हुए तीसरे पक्ष की पड़ताल से यह आंकड़े सामने आए हैं। पड़ताल में सामने आए आकड़ों के मुताबिक, कुल मिलाकर 97 में से 66 कस्बों में कम से कम एक नाला गंगा में गिरता है। इनमें से 31 पश्चिम बंगाल में थे। गंगा के किनारे बसे सबसे ज्यादा कस्बे (40) पश्चिम बंगाल में हैं। पश्चिम बंगाल के बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है। जहां के 21 कस्बे गंगा किनारे स्थित हैं। इस कड़ी में बिहार (18), उत्तराखंड (16) और झारखंड (2) राज्य आते हैं।

गंगा की हालत दिखाने वाले आंकड़े क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की करीब 6 हफ्तों की पड़ताल के बाद सामने आए हैं। यह सर्वेक्षण 1 दिसंबर 2018 से 15 दिसंबर 2018 तक किया गया। इस सर्वे में मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर द्वारा फोकस किए गए चार प्राथमिकता वाली जगहों को फोकस किया गया। सर्वे में सफाई, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सर्विस, ड्रेनेज सिस्टम और स्थानीय स्तर पर बने सॉलिड वेस्ट प्लांट को शामिल किया गया।

सामने आई इस रिपोर्ट के अनुसार, गंगा बेसिन के केवल 19 कस्बों में एक म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट प्लांट मौजूद था। यह भी सामने आया कि 33 कस्बों के कम से कम एक घाट पर ठोस कचरा मौजूद है। इसके अलावा 72 कस्बों में पुराने डम्पसाइट्स हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, रामनगर, और कानपुर सहित 13 शहरों के नाले सीधे गंगा में गिरते हैं। उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश सहित 10 शहरों में भी ऐसी ही स्थिति है।

बिहार के 56 फीसदी गंगा किनारे बसे शहरों का नाले सीधे गंगा में खुलते हैं। इसने निकलने वाले कचरे को रोकने के लिए किसी भी नाले पर जालियां या अन्य उपकरण नहीं लगाए गए। जबकि पश्चिम बंगाल के करीब तीन प्रतिशत शहरों के गिरने वाले नालों से निकलने वाले कचरे को रोकने की व्यवस्था की गई है वहीं राज्य के तीन परसेंट नालों के कचरों को रोकने के लिए लगाए गए उपकरण बेकार हो गए हैं।

स्टॉक टेकिंग वर्कशॉप में गंगा सफाई पर इस रिपोर्ट को पेश किया गया। जहां सभी राज्य प्रभारियों से फरवरी 2019 तक गंगा को लेकर हर स्तर के आंकड़े अलग अलग पेश करने को कहा गया है। इस मुद्दे पर नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के डायरेक्टर राजीव रंजन मिश्रा ने कहा, उनकी टीम मार्च के मध्य तक मूल्यांकन कर लेगी।

 

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