पश्चिम बंगाल विधानसभा ने बुधवार को कोलकाता और हावड़ा नगर निगमों में वार्डों की संख्या बढ़ाने से जुड़े दो संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी। ध्वनिमत से पारित इन विधेयकों के बाद कोलकाता नगर निगम (केएमसी) में वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 209 हो जाएगी, जबकि हावड़ा नगर निगम में 50 से बढ़कर 68 वार्ड होंगे। इसके साथ ही दोनों नगर निगमों में वार्डों के परिसीमन का रास्ता साफ हो गया है।
विधानसभा में पारित किए गए विधेयकों के नाम कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2026 और हावड़ा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (सेकंड अमेंडमेंट) बिल, 2026 हैं। नए प्रावधानों के तहत कोलकाता में 65 और हावड़ा में 18 नए वार्ड जोड़े जाएंगे।
हावड़ा नगर निगम में 2020 के बाद से चुनाव नहीं हुए
राज्य की नई भाजपा सरकार पहले ही इस साल के अंत तक कोलकाता और हावड़ा नगर निकायों के चुनाव कराने की घोषणा कर चुकी है। कोलकाता नगर निगम का चुनाव इस साल होना प्रस्तावित है, जबकि हावड़ा नगर निगम में 2020 के बाद से चुनाव नहीं हुए हैं। उस समय देश कोविड महामारी की चपेट में था।
आबादी के बदलाव के आधार पर होगा पुनर्गठन
शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि वार्डों के पुनर्गठन का उद्देश्य लोगों तक नागरिक सुविधाओं की तेज और बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि आबादी के वितरण में हुए बदलाव को देखते हुए वार्डों की संख्या और सीमाओं में बदलाव जरूरी हो गया है। पिछले महीने ही मंत्री ने कोलकाता नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के लिए दो उच्चस्तरीय समितियों के गठन की घोषणा की थी।
राज्य चुनाव आयोग करेगा परिसीमन
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में चर्चा के दौरान कहा कि राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसमें नगर मामलों के विभाग, भूमि एवं भूमि सुधार विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों की मदद ली जाएगी।
उन्होंने कहा कि कोलकाता नगर निगम का अपना कानून है और वार्डों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग निभाएगा। मसौदा अधिसूचना जारी होने के बाद प्रक्रिया पूरी करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया के दौरान दो सर्वदलीय बैठकें भी होंगी। पहली बैठक मसौदा अधिसूचना जारी होने से पहले और दूसरी अंतिम सूची जारी होने से पहले आयोजित की जाएगी।
फिरहाद हकीम ने उठाए सवाल
टीएमसी के बागी विधायक और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह सैद्धांतिक रूप से वार्डों के पुनर्गठन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पूरी प्रक्रिया किन नीतियों और मानदंडों के आधार पर की जा रही है।
हकीम ने कहा कि परिसीमन की पूरी जिम्मेदारी केवल नौकरशाहों के हाथों में छोड़ना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों के हितों को बेहतर तरीके से ध्यान में रखा जा सके।
उन्होंने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बूथ लेवल अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भूमिका होती है, उसी तरह वार्ड परिसीमन में भी निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।
‘क्या किसी खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है?’
कोलकाता में 65 नए वार्ड जोड़े जाने पर सवाल उठाते हुए हकीम ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि कहीं वार्डों की सीमाएं किसी खास समुदाय को ध्यान में रखकर तो नहीं बदली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नए वार्डों की सीमाएं तय करने के पीछे क्या आधार है और क्या इस प्रक्रिया में किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
सार्वजनिक सुझाव लेने की मांग
विधानसभा में फिरहाद ने भी प्रस्तावित परिसीमन को लेकर सरकार से सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोलकाता की मौजूदा आबादी को देखते हुए 209 से अधिक वार्डों की जरूरत हो सकती है। उन्होंने दक्षिण कोलकाता और जादवपुर इलाकों में आबादी में हुई ‘असामान्य वृद्धि’ का भी उल्लेख किया।
उनका सुझाव था कि वार्डों की सीमाएं तय करने से पहले आम लोगों से आवेदन और सुझाव लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, प्रत्येक वार्ड के संबंध में अलग-अलग सुनवाई किए जाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
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