ताज़ा खबर
 

62 दिन में 3500 किमी का सफर, 4 क्वारेंटाइन, 4 बार हुआ कोरोना टेस्ट; लेकिन अभी नहीं मिल सका परिवार से, नेविगेशन अफसर की कहानी

प्रवीण बुराठी ईरान के तेहरान में एक शिपिंग कंपनी में नेविगेशन अधिकारी हैं। फरवरी में कंपनी ने उनकी दो महीने की छुट्टी मंजूर कर ली थी। 28 फरवरी की उनकी तेहरान से भारत के लिए फ्लाइट थी। लेकिन वे स्वदेश तो पहुंच गए, लेकिन अब तक अपने परिवार से नहीं मिल पाए हैं।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: May 1, 2020 1:27 PM
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित ITBP केंद्र पर जांच कराता एक व्यक्ति। (फोटोः PTI)

कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया के 200 से ज्यादा देश लॉकडाउन हैं। भारत में भी 3 मई तक लॉकडाउन लागू है। इसके आगे भी बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। लॉकडाउन के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है। लोग जहां के तहां फंसे हैं। विदेश में फंसे भारतीयों का भी बुरा हाल है। इसमें उत्तराखंड में चंपावत के रहने वाले प्रवीण बुराठी भी शामिल हैं। 25 साल के बुराठी ईरान की राजधानी तेहरान में एक शिपिंग कंपनी में नेविगेशन अधिकारी हैं। फरवरी में कंपनी ने उनकी दो महीने की छुट्टी मंजूर कर ली थी। 28 फरवरी की उनकी तेहरान से भारत के लिए फ्लाइट थी। बुराठी भी अपने परिवार से मिलने को बेचैन थे, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।

28 फरवरी की तारीख है और आज का दिन, वे अब तक अपने परिवार से नहीं मिल पाए हैं। हालांकि, वे तेहरान से 18 मार्च को ही स्वदेश लौट आए थे, लेकिन अपने घर नहीं पहुंच पाए। वे अब तक 4 बार क्वारेंटाइन किए जा चुके हैं। 4 बार उनका कोरोना टेस्ट हो चुका है, 3551 किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन परिजनों को अब तक नहीं देख पाएं हैं। आइए जानते हैं नियति ने उनके साथ कैसा खेल खेला।

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, प्रवीण की तेहरान से इंडिया के लिए 28 फरवरी की फ्लाइट थी, लेकिन इससे ठीक पहले ईरान प्रशासन ने उन्हें 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में भेज दिया। वे 1 मार्च से 14 मार्च तक ईरान में क्वारेंटाइन में रहे। इस दौरान उनका दो बार टेस्ट हुआ। दोनों रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वे 18 मार्च को 195 अन्य भारतीयों के साथ दिल्ली के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट में सवार हुए। दिल्ली पहुंचने पर उन सभी लोगों को दो घरेलू उड़ानों के जरिए राजस्थान के जैसलमेर स्थित आर्मी कैंप ले जाया गया और 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन में रखा गया। यहां भी प्रवीण की किस्मत उनसे रूठी रही।

31 मार्च को सभी का कोरोना टेस्ट हुआ। इसकी रिपोर्ट 5 अप्रैल को आई। इसमें दो लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, इसलिए अन्य सभी लोगों को उसी केंद्र पर फिर से 14 दिनों के लिए क्वारेंटाइन में भेज दिया गया। 19 अप्रैल को फिर उनके कोरोना टेस्ट हुए। 23 अप्रैल को रिपोर्ट आई। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। सभी को घर जाने की मंजूरी मिल गई, लेकिन जैसलमेर में अधिकारियों से पास हासिल करने में उन्हें तीन दिन लग गए। इस दौरान वे क्वारेंटाइन सेंटर में ही रहे।

प्रवीण ने बताया, पास मिलने के बाद 30 हजार रुपए में टैक्सी किराए पर ली और चंपावत के लिए रवाना हुआ। मंगलवार यानी 28 अप्रैल को मैं चंपावत पहुंचा। वहां मैं सीधा पुलिस थाने गया और अपने आने की सूचना दी। उन्होंने मेरी ट्रैवल हिस्ट्री को देखते हुए मुझे फिर से 14 दिनों के लिए एक स्थानीय होटल में क्वारेंटाइन के लिए रख दिया।

25 साल के प्रवीण ने बताया, यदि मैं सीधे अपने गांव गया होता, तो आने बात छिपाने के लिए पुलिस मेरे खिलाफ कार्रवाई करती। ग्रामीण भी पुलिस को बता सकते थे, इसलिए मैंने सोचा कि सबसे पहले मैं पुलिस को अपने गांव आने की सूचना दूंगा। मुझे इस क्वारेंटाइन के खत्म होने का बेसब्री से मिलने का इंतजार है। यह मेरे जीवन के अब तक का सबसे लंबा और सबसे थकाऊ सफर रहा है। अपने परिवार के साथ रहना चाहता हूं।

Coronavirus से जुड़ी जानकारी के लिए यहां क्लिक करें:
कोरोना वायरस से बचना है तो इन 5 फूड्स से तुरंत कर लें तौबा
जानिये- किसे मास्क लगाने की जरूरत नहीं और किसे लगाना ही चाहिए
इन तरीकों से संक्रमण से बचाएं
क्या गर्मी बढ़ते ही खत्म हो जाएगा कोरोना वायरस?

प्रवीण का ईरान से चंपावत तक का सफर: ईरान से नई दिल्ली की हवाई दूरी : 2278 किमी। नई दिल्ली से राजस्थान की दूरी : 425 किलोमीटर। राजस्थान से नई दिल्ली : 425 किमी। नई दिल्ली से चंपावत की दूरी : 423 किमी। कुल सफर : 3551 किलोमीटर।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 टीबी मरीज की कोरोना रिपोर्ट आई नेगेटिव, घर पहुंचाने की बजाए रोड के किनारे छोड़ गई एंबुलेंस, जांच के आदेश
2 प्रवासियों के घर लौटने का विरोध करने वाले नीतीश कुमार ने की स्पेशल ट्रेन की मांग, डिप्टी सीएम भी आए साथ
3 ..जब बाबू जगजीवन राम को ‘फेल’ करने को इंदिरा गांधी ने लिया था ऋषि कपूर की ‘बॉबी’ का सहारा, जानिए पूरा मामला