राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने म्यांमार में सशस्त्र संगठनों को ड्रोन चलाने और उससे जुड़ी तकनीक की ट्रेनिंग देने के आरोप में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें छह यूक्रेन के नागरिक और एक अमेरिकी नागरिक शामिल है। NIA ने 8 सितंबर 2026 को यह चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जांच अभी जारी है।

एनआईए के मुताबिक, चार्जशीट इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत दाखिल की गई है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि चार्जशीट दाखिल करने की तय समयसीमा 8 सितंबर को खत्म हो रही थी। अधिकारियों का कहना है कि यूएपीए से जुड़े मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इस दिशा में आगे की कार्रवाई जारी है।

मार्च में हुई थी सातों की गिरफ्तारी

यह मामला मार्च 2026 में सामने आया था। एनआईए ने देश के अलग-अलग शहरों से छह यूक्रेनी नागरिकों और अमेरिकी नागरिक वैन डाइक को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एजेंसी की जांच में दावा किया गया कि आरोपी म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों (EAGs) के संपर्क में थे और उन्हें ड्रोन युद्ध से जुड़ी तकनीकी ट्रेनिंग दे रहे थे।

एनआईए ने 13 मार्च 2026 को गृह मंत्रालय के निर्देश पर इस मामले में केस दर्ज किया था। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी दिसंबर 2025 में भारत पहुंचे थे और इसके बाद भारत-म्यांमार सीमा को अवैध तरीके से पार कर म्यांमार के विक्टोरिया कैंप पहुंचे।

CNF और KIA के सदस्यों को दी ड्रोन ट्रेनिंग

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों के सदस्यों को ड्रोन युद्ध, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जामिंग तकनीक की ट्रेनिंग दी। इनमें चिन नेशनल फ्रंट (CNF) और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) जैसे संगठन शामिल हैं।

अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों ने म्यांमार में इन समूहों के साथ संयुक्त लड़ाकू अभियानों में भी हिस्सा लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को CNF के सदस्यों की ओर से लॉजिस्टिक सहायता मिली थी।

म्यांमार के विद्रोही समूह से मिली मदद

एनआईए की जांच में कथित तौर पर यह भी पता चला कि इस मिशन के लिए वित्तीय मदद म्यांमार स्थित एक विद्रोही समूह के कमांडर के जरिए जुटाई गई थी। एजेंसी इस पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

एनआईए ने पहले आरोप लगाया था कि म्यांमार के ये जातीय सशस्त्र समूह वहां की सैन्य सरकार यानी जुंटा के खिलाफ लड़ रहे हैं। साथ ही, इन समूहों के भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को समर्थन देने की बात भी जांच के दौरान सामने आई थी।

UAPA मामले में जांच अभी जारी

इस मामले में शुरुआत में भारतीय दंड व्यवस्था के तहत नहीं, बल्कि यूएपीए की धारा 18 और इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धाराओं 21 और 23 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अब एनआईए ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन यूएपीए से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है।

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