ताज़ा खबर
 

शिक्षा सुधार के लिए आरएसएस की वर्कशाप में आए 51 वाइस चासंलर सहित 721 शिक्षाविद्, कई नौकरी के लिए साथ लाए सीवी

ज्ञान संगम नाम के इस कार्यक्रम का आयोजन आरएसएस की प्राज्‍न प्रवाह की ओर से किया और मोहन भागवत भी इसमें शामिल हुए।

Author नई दिल्‍ली | March 27, 2017 3:15 PM
दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आयेाजित दो दिवसीय कार्यशाला में केंद्रीय व राज्‍य विश्‍वविद्यालयों के 51 वाइस चांसलर सहित 721 शिक्षा जानकार शामिल हुए।

दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आयेाजित दो दिवसीय कार्यशाला में केंद्रीय व राज्‍य विश्‍वविद्यालयों के 51 वाइस चांसलर सहित 721 शिक्षा जानकार शामिल हुए। आयोजकों की ओर से बताया गया कि कार्यशाला में भारतीय शिक्षा को भारतीय परिपेक्ष्‍य के अनुसार कैसे बनाया जाए, इस पर विचार किया गया। ज्ञान संगम नाम के इस कार्यक्रम का आयोजन आरएसएस की प्राज्‍न प्रवाह की ओर से किया और मोहन भागवत भी इसमें शामिल हुए। भारतीय इतिहास खोज परिषद के चेयरमैन वाई सुदर्शन राव, संघ के सहकार्यवाह कृष्‍ण गोपाल और सुरेश सोनी भी श्रोताओं में मौजूद थे।

भागवत ने अपने भाषण में गैर सरकारी और स्‍वायत्‍त भारतीय विचारों पर जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि यह विकल्‍प नहीं बल्कि भारतीय परिपेक्ष्‍य को विकसित करने का वास्‍तविक प्रयास है। कार्यक्रम के बारे में जे नंदकुमार ने बताया कि अलग-अलग आयोगों की रिपोर्ट में शिक्षा व्‍यवस्‍था में भारतीयता की कमी का जिक्र किया गया है। उन्‍होंने कहा, ”हमारी शिक्षा में भारतीयता की कमी है। हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था के केंद्र में पश्चिम के प्रति झुकाव है। इस केंद्र को फिर से भारतीय विचारों की ओर से कैसे लाया जाए, इस पर जानकारों ने मंथन किया।”

इस कार्यक्रम में कई लोग सीवी साथ लेकर आए थे और वे अलग-अलग संस्‍थानों में नौकरी मांग रहे थे। कईयों ने कहा कि काफी सारे अकादमिक पद खाली पड़े हैं और कई पदों पर विरोधी विचारधारा के लोग हैं। उन्‍हें भागवत ने कहा कि सरकार से उम्‍मीद रखना संघ के चरित्र के खिलाफ है। पहले यह कार्यक्रम हंसराज कॉलेज में होना था लेकिन छात्रों के विरोध की संभावना को देखते हुए इसे महाराजा अग्रसेन तकनीकी और प्रबंधन संस्‍थान में आयोजित किया गया। इसमें आरएसएस विचारक राकेश सिन्‍हा की किताब स्‍वराज इन आर्इडियाज को आए हुए लोगों में बांटा गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App