500 ड्रोन से नापेंगे कश्मीर से कन्याकुमारी तक 6 लाख गांव, जानें क्या है स्वामित्व स्कीम

ये ड्रोन 83 करोड़ से अधिक भारतीयों की आवासीय संपत्तियों को वैध बनाने के लिए देश के लगभग 6 लाख गांवों का नक्शा बनाएंगे। यह अब तक का सबसे बड़ा हवाई सर्वेक्षण होगा।

Swamitva scheme, land mapping
SVAMITVA योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत के लिए एक एकीकृत संपत्ति सत्यापन समाधान प्रदान करना है। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

देश के अंदर जमीन जायदाद के झगड़ों का निपटारा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की बहुउद्देश्यीय और महत्वपूर्ण स्वामित्व योजना 2020 के तहत गांवों की मैपिंग के लिए 500 उच्च क्षमता वाले ड्रोन लगाए जाएंगे। ये ड्रोन 83 करोड़ से अधिक भारतीयों की आवासीय संपत्तियों को वैध बनाने के लिए देश के लगभग 6 लाख गांवों का नक्शा बनाएंगे। यह अब तक का सबसे बड़ा हवाई सर्वेक्षण होगा।
सर्वेक्षण जैसे ही पूरा होगा देश की एक बड़ी आबादी को अपनी ग्रामीण आवासीय संपत्ति को कानूनी रूप देने और उसका वित्तीय संपत्ति के रूप में उपयोग करने में आसानी हो जाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस योजना की पिछले साल अक्टूबर में शुरुआत की थी।

भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी और शिलांग से सोमनाथ तक फैले ग्रामीण भूमि पर ड्रोन पायलटों की एक बड़ी ताकत को सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) तैनात कर रही है। बड़े पैमाने पर भूमि सर्वेक्षण योजना को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार ने कहा, “एक उच्च तकनीक वाले ड्रोन को औसत भारतीय गांव का नक्शा बनाने में लगभग 15 मिनट लगते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि मार्च 2024 तक देश में ‘ड्रोन उड़ान’ कार्य पूरा हो जाएगा।”

देश में तेलंगाना को छोड़कर लगभग सभी राज्यों ने अपने संबंधित क्षेत्राधिकार में संपूर्ण ग्रामीण संपत्तियों का नक्शा बनाने की सहमति दी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस मेगा योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपनी संपत्ति को जानने और पहचान करने में मदद मिलेगी।

यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि “एक बार सर्वेक्षण पूरा हो जाने के बाद, प्रत्येक मालिक को एक संपत्ति कार्ड दिया जाएगा। यह कार्ड उनको वित्तीय संपत्ति के रूप में अपनी आवासीय भूमि का उपयोग करने में सक्षम बनाएगा। इससे वे बैंकों से ऋण लेने के लिए अधिकृत होंगे।

पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी ने ड्रोन सर्वेक्षण के लिए पायलट परियोजना की शुरुआत की थी। तब यह केवल छह राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र तक ही सीमित थी।

बाद में सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से किए जा रहे इस काम में राजस्थान और आंध्र प्रदेश ने भी केंद्र के साथ हाथ मिलाया और भूमि सर्वेक्षण के लिए जाने के लिए सहमति व्यक्त की।

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