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बडगाम एअरबेसः अपने ही हेलिकॉप्टर को दुश्मन का वायुयान समझकर उड़ा था दिया MI 17 वी5, पांच अधिकारी दोषी करार

वायुसेना ने एअर कोमोडोर रैंक के अधिकारी को इस मामले की जांच सौंपी थी। इस जांच में कुछ देरी हुई थी, क्योंकि बडगाम में ग्रामीणों ने बाकी हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स चुरा लिया था। हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचे सेना के वाहनों पर पत्थरबाजी भी की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि वायुसेना के एअरबेस पर वायु रक्षा की जिम्मेदारियां संभाल रहे अधिकारी एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टर को बेस की तरफ आती हुई मिसाइल समझ बैठे थे।

Author Updated: August 24, 2019 6:37 AM
जब यह हादसा हुआ, उसी दौरान करीब 100 किलोमीटर दूर नौशेरा के हवाई क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के जंगी विमान पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों को सीमा से बाहर खदेड़ रहे थे। इसी अभियान में विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था।

श्रीनगर के बडगाम में 27 फरवरी को हुए एमआइ-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटना मामले में गठित वायुसेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने पांच अधिकारियों को दोषी करार दिया है। इस हादसे में वायुसेना के छह अधिकारियों की मौत हो गई थी। बडगाम एअरबेस पर तैनात वायुसेना के अधिकारियों ने उस दिन अपने ही हेलिकॉप्टर को दुश्मन का वायुयान या मिसाइल समझकर ‘स्पाइडर एअर डिफेंस मिसाइल सिस्टम’ का इस्तेमाल कर उड़ा दिया था। भारतीय वायु सेना ने जांच के नतीजों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। वायुसेना ने मई में घटना की गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए श्रीनगर अड्डे के एअर ऑफिसर कमांडिंग का तबादला कर दिया था।

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट वायुसेना के मुख्यालय में शुक्रवार को जमा की गई है। वायुसेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी ने श्रीनगर एयरबेस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर सहित कुल पांच अधिकारियों (वायुसेना के एक ग्रुप कमांडर, दो विंग कमांडर और दो फ्लाइट लेफ्टिनेंट) को फ्रेंडली फायरिंग (सेना की परिभाषा में अपने ही साथियों पर गोलाबारी करने) का दोषी पाया है। इन अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई भी हो सकती है। इन्हें लापरवाही और सही प्रक्रिया का पालन ना करने का दोषी पाया गया, जिसकी वजह से हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया था।

वायुसेना ने एअर कोमोडोर रैंक के अधिकारी को इस मामले की जांच सौंपी थी। इस जांच में कुछ देरी हुई थी, क्योंकि बडगाम में ग्रामीणों ने बाकी हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स चुरा लिया था। हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचे सेना के वाहनों पर पत्थरबाजी भी की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि वायुसेना के एअरबेस पर वायु रक्षा की जिम्मेदारियां संभाल रहे अधिकारी एमआई-17 वी5 हेलिकॉप्टर को बेस की तरफ आती हुई मिसाइल समझ बैठे थे। जबकि यह हेलिकॉप्टर एक मिशन से वापस लौट रहा था। हेलिकॉप्टर का ‘फ्रैंड और फो’ सेंसर ऑन नहीं था, जिसके चलते कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में मौजूद अधिकारी ये समझ नहीं पाए कि ये अपना हेलिकॉप्टर है या दुश्मन का। उस पर मिसाइल दाग दी गई। 27 फरवरी को 154 हेलिकॉप्टर यूनिट का हेलिकॉप्टर टेकआॅफ के 10 मिनट बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में वायुसेना के छह अधिकारियों के अलावा एक स्थानीय की मौत हो गई थी।

जब यह हादसा हुआ, उसी दौरान करीब 100 किलोमीटर दूर नौशेरा के हवाई क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के जंगी विमान पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों को सीमा से बाहर खदेड़ रहे थे। इसी अभियान में विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। दरअसल, पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी तड़के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के निकट बालाकोट में आतंकवादी ठिकानों पर बमबारी कर उन्हें ध्वस्त कर दिया था। पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने इसके जवाब में अगले दिन यानी 27 फरवरी की सुबह भारतीय ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की, जिसे वायुसेना ने विफल कर दिया था।

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