दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति ने शहर के 48 गांवों को शहरी दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस कदम का उद्देश्य इन क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार करना और नियोजित विकास के नियमों को लागू करना है।

स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि यह निर्णय दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507(ए) के तहत लिया गया है। इससे सड़कों, जल निकासी, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन जैसी नागरिक सेवाओं को बेहतर ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी। शर्मा ने बताया कि कई गांवों का स्वरूप पहले ही शहरी हो चुका था और व्यवस्थित विकास कार्यों के लिए उन्हें औपचारिक मान्यता की आवश्यकता थी।

कहां-कहां के शहर होंगे विकसित?

अधिकारियों के अनुसार, ये गांव उत्तर, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिल्ली के जिलों में स्थित हैं, जहां बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं की योजना है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव दिल्ली के मास्टर प्लान-2041 के अनुरूप है और इससे राजधानी में हो रहे तेजी से शहरीकरण को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। शर्मा के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में शहरी गतिविधियां पहले ही बढ़ चुकी हैं, उन्हें औपचारिक ढांचे के तहत लाने से बेहतर नियोजन और नियमन संभव हो सकेगा।

एक बयान के अनुसार, इस कदम से अवैध निर्माण पर भी रोक लगेगी, क्योंकि इन गांवों में निर्माण गतिविधियों और भूमि उपयोग को अब एमसीडी के नियमों के दायरे में लाया जाएगा। स्थायी समिति की मंजूरी के बाद अब इस प्रस्ताव को सदन के सामने रखा जाएगा और फिर अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ये गांव औपचारिक रूप से शहरी कहलाएंगे।

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