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दो दिनों में 44 रेड, वीवो के चाइनीज डायरेक्टर भारत से भागे, मनी लांड्रिंग केस में चल रही है जांच

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चीनी फर्म के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच तेज कर दी है। इसके तहत मंगलवार को देशभर में 44 जगहों पर छापेमारी हुई है। इस बीच वीवो के निदेशक भारत से भाग गए हैं।

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मोबाईल फोन बनाने वाली चीनी कंपनी वीवो (फोटो सोर्स- द इंडियन एक्सप्रेस)

मनी लॉन्ड्रिंग केस में चल रही जांच के बीच वीवो के दो डायरेक्टर भारत छोड़कर भाग गए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ईडी द्वारा चीनी फर्म के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच तेज करने के बाद वीवो के निदेशक झेंगशेन ओउ और झांग जी भारत से भाग गए। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को वीवो और संबंधित फर्मों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में देश भर में 44 जगहों पर छापे मारे थे।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को चीनी फर्म से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कुछ दक्षिणी राज्यों में 44 स्थानों पर छापेमारी की थी। सूत्रों ने कहा कि ईडी की कई टीमों ने सुबह से ही छापेमारी शुरू कर दी थी। इस मामले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।

बता दें कि दिल्ली में भी मोबाइल बनाने वाली चीनी कंपनी वीवी के दफ्तर पर ईडी ने छापा मारा था। यहां पर अधिकारियों और कर्मचारियों से टीम ने तकरीबन सात घंटे पूछताछ की थी। इसके साथ ही दफ्तर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी ईडी की टीम ने अपने कब्जे में ले लिया।

बता दें कि पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय ने श्योमी कंपनी की 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त की थी। इसी क्रम में अब वीवो पर भी भारी गड़बड़ियों का आरोप है। बताया जा रहा है कि वीवो कंपनी ने हजारों करोड़ रुपए की हेराफेरी की है।

आईटी विभाग के साथ-साथ कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय भी चीनी निर्माण फर्मों पर कड़ी नजर रखे हुए है। ईडी का यह छापा चीनी कंपनियों के खिलाफ जांच का विस्तार है।

ईडी ने ये छापेमारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के उल्लंघन के संबंध में की थी। सूत्रों ने कहा कि वीवो मोबाइल कम्युनिकेशंस की स्थानीय इकाइयां चीन की अन्य फर्मों की जांच के तहत कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए रडार पर हैं।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को धोखाधड़ी सहित संभावित उल्लंघनों पर विशेष ध्यान देने के लिए जाना जाता है। वीवो के मामले में, इस साल अप्रैल में यह पता लगाने के लिए जांच की मांग की गई थी कि क्या “स्वामित्व और वित्तीय रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण अनियमितताएं” हुई थीं।

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