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4000 करोड़ के पोंजी स्कैम में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री गिरफ्तार

शिवाजी नगर से पूर्व विधायक बेग को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

Author Translated By Ikram नई दिल्ली | November 23, 2020 9:26 AM
bengaluru news cbi latest newsपूर्व मंत्री रोशन बेग। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

सीबीआई ने चार हजार करोड़ रुपए के आई-मॉनेटरी एडवायजरी (आईएमए) पोंजी घोटाला मामले में रविवार रात कर्नाटक के पूर्व मंत्री रोशन बेग को गिरप्तार कर लिया। बेग पिछले साल कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा नेता पर आरोप है कि इसमें उन्होंने कई करोड़ रुपए की ठगी की है। सूत्रों के अनुसार बेग को रविवार सुबह सीबीआई कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था और ‘ठोस सबूतों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।’ रोशन बेग कांग्रेस विधायक थे, जिन्हें अयोग्य करार दिया गया था।

सूत्रों ने कहा कि शिवाजी नगर से पूर्व विधायक बेग को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कर्नाटक स्थित आईएमए और इसके समूह की कंपनियों द्वारा चलाई जा रही करोड़ों रुपए की पोंजी स्कीम में कथित रूप से निवेश के इस्लामिक तरीकों का इस्तेमाल कर ऊंचे रिटर्न देने का वादा करके हजारों लोगों को ठगा गया था।

दरअसल 40 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी बचत गिरफ्तार व्यवसायी मोहम्मद मंसूर खान के आईएमए समूह द्वारा संचालित पोंजी स्कीम में लगा दी। ये रकम करीब चार हजार करोड़ रुपए बैठती है। इस घोटाले के करीब 18 महीने बाद रोशन बेग का नाम सामने आया। इसी समय मंसूर खान देश छोड़कर फरार हो गए और बेंगलुरु क्राइम ब्रांच द्वारा उन्हें जुलाई, 2019 में दुबई से भारत वापस लाया गया।

छिपने के दौरान खान ने एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया था कि कई राज्यों के नेताओं और अधिकारियों ने उन्हें रिश्वत देने को मजबूर किया जो आईएमए के पतन की वजह बना। रिश्वत लेने वाले में एक नाम रोशन बेग का भी था। खान ने दावा किया कि बेग ने उनसे करीब चार सौ करोड़ रुपए लिए, जो तब सेंट्रल बेंगलरु की शिवाजी नगर विधानसभा से विधायक से थे।

साल 2019 के मध्य में जांच के दौरान पुलिस को दस्तावेज मिले जिसमें खान के प्रमुख सहयोगियों ने नेताओं, पुलिसकर्मियों और सरकारी अधिकारियों को किए गए भुगतान को दर्ज किया था। दस्तावेजों में पता चला कि पैसे लेने वालों में प्रमुख नाम रोशन बेग का था। आरोपियों में नाम आने के बावजूद बेग कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार में पुलिस की स्पेशल जांच टीम से बचने में कामयाब रहे। सरकार गिरने के बाद उनपर शिकंजा कसता चल गया।

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