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एलएन मिश्र हत्याकांड में 4 दोषियों को उम्रकैद

बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर करीब 40 साल पहले हुए एक विस्फोट में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र और दो अन्य की हत्या के कसूरवार ठहराए गए चार लोगों को दिल्ली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। जिला न्यायाधीश विनोद गोयल ने गुरुवार को रंजन द्विवेदी, संतोषानंद, सुदेवानंद और गोपाल को […]

Author December 19, 2014 8:57 AM
ललितनारायण मिश्र हत्याकांड के मुजरिमों को गुरुवार को नई दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ले जाती पुलिस। (फोटो: जनसत्ता)

बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर करीब 40 साल पहले हुए एक विस्फोट में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र और दो अन्य की हत्या के कसूरवार ठहराए गए चार लोगों को दिल्ली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।

जिला न्यायाधीश विनोद गोयल ने गुरुवार को रंजन द्विवेदी, संतोषानंद, सुदेवानंद और गोपाल को सजा सुनाई जिन्हें आइपीसी की धारा 302, 326, 324 और 120-बी समेत कई प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था। जज ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में कहा कि यह अदालत रंजन द्विवेदी, संतोषानंद, सुदेवानंद और गोपाल को उम्रकैद की सजा सुनाती है। अदालत ने सजा के अतिरिक्त संतोषानंद (75) और सुदेवानंद (79)पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया, वहीं 66 साल के द्विवेदी और 73 साल के गोपाल पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।

अदालत ने अपने फैसले में बिहार सरकार को निर्देश दिया कि मिश्र और दो अन्य मृतकों के कानूनी उत्तराधिकारियों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने बिहार सरकार से घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सभी सात लोगों के परिजनों को डेढ़ लाख रुपए और मामूली रूप से चोटिल हुए 20 अन्य के परिवारों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। जज ने कहा कि मुआवजा राज्य सरकार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से देगी। चारों दोषियों को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत हैंड ग्रेनेड रखने का गुनहगार भी ठहराया गया।

अदालत ने आठ दिसंबर को द्विवेदी को और अन्य तीन आनंदमार्गियों को दो जनवरी, 1975 में समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर विस्फोट में मिश्र और दो अन्य की जान लेने की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का दोषी ठहराया था।

हत्याकांड का घटनाक्रम इस प्रकार है – दो जनवरी, 1975 को बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुए एक बम विस्फोट में मिश्र घायल हुए थे, उसी दिन रेलवे पुलिस, समस्तीपुर में एक मामला दर्ज किया गया। तीन जनवरी, 1975 को मिश्र का इलाज के दौरान निधन। सात जनवरी, 1975 को सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज किया। 12 नवंबर, 1975 को सीबीआइ ने पटना के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष 12 व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। 17 दिसंबर, 1979 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले को दिल्ली स्थानांतरित किया गया।

यह पहला ऐसा मामला था जिसे सबूत नष्ट होने की आशंका के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य के बाहर स्थानांतरित किया गया। 23 मई, 1980 को मामले दिल्ली सत्र अदालत को भेजा गया। 21 जनवरी, 1981 को आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए। 12 अक्तूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से स्थिति रिपोर्ट मांगी। 17 अगस्त, 2012 को शीर्ष अदालत का 37 साल के विलंब के आधार पर मुकदमे की कार्यवाही निरस्त करने से इनकार। 12 सितंबर, 2012 में मामले में दिल्ली की अदालत में अंतिम बहस शुरू हुई। 14 सितंबर, 2012 को सीबीआइ ने दिल्ली की अदालत से कहा कि हत्या के पीछे आनंद मार्गियों का हाथ था।

12 सितंबर, 2014 में अदालत में सुनवाई पूरी और 10 नवंबर को फैसला सुनाने का निश्चय। 10 नवंबर, 2014 को अदालत ने फैसला आठ दिसंबर के लिए टाल दिया। आठ दिसंबर, 2014 में अदालत ने संतोषानंद, सुदेवानंद, गोपाल और अधिवक्ता रंजन द्विवेदी को मिश्र और दो अन्य की हत्या के लिए दोषी ठहराया। 15 दिसंबर, 2014 में अदालत ने सजा पर दलीलें सुनी। 18 दिसंबर, 2014 को दिल्ली की अदालत ने चार दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई।

 

 

 

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