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रामपाल 5 दिन की रिमांड पर, देश के खिलाफ जंग और मर्डर का मामला दर्ज

विवादास्पद ‘स्वयंभू संत’ रामपाल की मुश्किलें गुरुवार को उस समय और बढ़ गर्इं जब पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने एक हत्याकांड में उसकी जमानत रद्द कर दी और जेल भेज दिया। वहीं पुलिस ने बुधवार रात रामपाल की गिरफ्तारी से पहले तक आश्रम में चले गतिरोध के बीच छह लोगों की मौत को लेकर […]

Author Updated: November 21, 2014 11:15 AM

विवादास्पद ‘स्वयंभू संत’ रामपाल की मुश्किलें गुरुवार को उस समय और बढ़ गर्इं जब पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने एक हत्याकांड में उसकी जमानत रद्द कर दी और जेल भेज दिया। वहीं पुलिस ने बुधवार रात रामपाल की गिरफ्तारी से पहले तक आश्रम में चले गतिरोध के बीच छह लोगों की मौत को लेकर उसके खिलाफ हत्या और हिंसा के आरोप दर्ज किए।

रामपाल को हाई कोर्ट के दो सदस्यीय पीठ के समक्ष दोपहर दो बजे पेश किया गया जिसने अवमानना के एक मामले में उसकी पेशी के लिए बुधवार की समयसीमा तय की थी। उसे 28 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जिस दिन अगली सुनवाई होगी। हरियाणा पुलिस ने इस अभियान को सफल बताते हुए रामपाल पर हत्या के आरोप दर्ज किए और अभियान के दौरान बने रहे गतिरोध के मद्देनजर जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया। पुलिस ने 469 लोगों को भी गिरफ्तार किया जिनमें तीन लोग नेपाल के हैं।

पहले तीन बार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अदालत में पेश नहीं हुए 63 साल के रामपाल को गुरुवार सुबह पंचकूला के एक सरकारी अस्पताल में जरूरी चिकित्सा जांच के लिए ले जाया गया और उसके सभी स्वास्थ्य संबंधी मापदंड सही पाए गए। न्यायमूर्ति एम जयपॉल और न्यायमूर्ति दर्शन सिंह के पीठ ने सुनवाई के दौरान 2006 में दर्ज हत्या के एक मामले में रामपाल की जमानत रद्द कर दी। साल 2006 में रोहतक जिले के कैंथोला में रामपाल के आश्रम में संघर्ष के बाद एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी और कुछ अन्य घायल हो गए थे।

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एसएन वशिष्ठ ने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि आश्रम में पांच महिलाओं और एक नवजात की मौत के सिलसिले में और मंगलवार को हुई हिंसा के सिलसिले में रामपाल के खिलाफ दो नए मामले दर्ज किए गए हैं। मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भीतरी चोट लगने की बात पता चली है लेकिन मौत के वास्तविक कारणों का पता फोरेंसिक और रासायनिक परीक्षण के बाद ही चलेगा।

अब आश्रम से रामपाल के समर्थकों को पूरी तरह निकाल दिया गया है और पुलिस के विशेष दल परिसर में सघन जांच कर रहे हैं। वशिष्ठ ने कहा कि रामपाल के एक करीबी सहयोगी और उसकी बेटी समेत 469 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 28 नवंबर की तारीख तय की और हरियाणा पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि एक हलफनामा दाखिल कर रामपाल को बरवाला स्थित उसके आश्रम से गिरफ्तार करने के लिए चलाए गए अभियान और इस दौरान लोगों के घायल होने, आश्रम में हथियार होने और संपत्ति को नुकसान का ब्योरा दिया जाए। बाद में रामपाल को उसके और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज देशद्रोह, आगजनी, दंगा फैलाने, हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारियों को उनका काम करने से रोकने समेत अनेक आरोपों के सिलसिले में हिसार ले जाया गया।

वशिष्ठ ने पत्रकार सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर जांच के दौरान रामपाल का माओवादियों से तार जुड़े होने का पता चला तो उसकी भी पूरी तरह जांच की जाएगी। उन्होंने कहा-अब तक 469 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ज्यादातर लोगों से पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार किए गए कुल लोगों में 118 राजस्थान से, 116 हरियाणा से, 72 मध्य प्रदेश से, 10 बिहार से, 83 उत्तर प्रदेश से और तीन नेपाल से हैं। डीजीपी ने कहा-हमने रामपाल के वफादार बलजीत को भी गिरफ्तार कर लिया है। बलजीत की बेटी बबीता को भी गिरफ्तार किया गया है और उसके पास से एक लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, दस हार्ड डिस्क, 17 सीडी, तीन टेलीफोन डायरी और पांच फाइलें जब्त की गई हैं।

एक विशेष दल इन सभी उपकरणों की पड़ताल करेगा जिसमें साइबर विशेषज्ञ शामिल होंगे। वशिष्ठ के मुताबिक जो भी जानकारी मिलती है उसे सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक और करीबी राम कुंवर धाका को भी गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं रामपाल के भाई और प्रमुख कार्यकर्ता पुरुषोत्तम दास और अन्य को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

मामले में न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने कहा कि अदालत ने हरियाणा के मुख्य सचिव को यह निर्देश भी दिया कि रामपाल के स्वामित्व वाली संपत्तियों के संबंध में एक रिपोर्ट जमा की जाए। खंडपीठ ने न्यायमित्र से यह भी बताने को कहा कि रामपाल और अन्य के खिलाफ हत्याकांड में मुकदमा चलाने के लिए उचित स्थान कौन सा हो सकता है। फिलहाल रामपाल और 37 अन्य लोगों पर रोहतक की एक सत्र अदालत में 2006 के हत्याकांड के सिलसिले में मुकदमा चल रहा है। रामपाल की ओर से वरिष्ठ वकील एसके गर्ग ने कहा कि रामपाल खुद आश्रम में बंधक थे। उन्होंने कहा, ‘मैं सही समय पर खुलासा करूंगा। वे कानून से ऊपर नहीं है’।

 

 

 

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